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- Water Level In Many Rivers Of Bihar Increased Due To Rain In Nepal, 56 Thousand Cusecs Of Water Increased In 12 Hours At Kosi Barrage
नई दिल्ली8 मिनट पहले
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नेपाल में हो रही बारिश के बाद राज्य की कई नदियों का वॉटर लेवल बढ़ने लगा है। 12 जिलों के 29 लाख 62 हजार 653 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। समस्तीपुर में बूढ़ी गंडक नदी खतरे के निशान से करीब ढाई मीटर ऊपर बह रही है। खगड़िया में कोसी 2.10 मीटर, जबकि सीतामढ़ी और दरभंगा में बागमती खतरे के निशान से 2-2 मीटर ऊपर हैं। गंगा कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। कोसी का वॉटर लेवल भी तेजी से बढ़ा है।
बाढ़ में जुगाड़ का सहारा

यह फोटो बिहार के किशनगंज जिले की है। यहां के टेढ़ागाछ ब्लॉक की झुनकी पंचायत में पुल पर बाढ़ का पानी आ गया। इससे वाहनों की आवाजाही बंद हो गई। ऐसे में कुछ लोग वाहनों को एक तरफ से दूसरी तरफ ले जाने के लिए ड्रम की नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं।
गंडक नदी का वॉटर लेवल फिर बढ़ने लगा

गंडक नदी का वॉटर लेवल फिर बढ़ने लगा है। वहीं, बराज से 2 लाख 33 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जिससे सारण जिले के तरैया और पानापुर के खाली इलाके में भी पानी फैल गया है। दोनों ही जगहों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। सड़कों पर तीन फीट तक पानी है।
गोपालगंज में सारण बांध टूटने से गंडक नदी का पानी तेजी से पानापुर और तरैया की ओर बढ़ा। मंगलवार की सुबह होते-होते यह पानी 32 गांवों में पहुंच गया। घर डूब गए, ऐसे में लोगों को छतों पर जाना पड़ा।
बैकुंठपुर की 5 पंचायतों के 23 नए गांवों में बाढ़

बिहार के गोपालगंज जिले के 4 ब्लॉक में पानी भर गया है। 24 घंटे के दौरान बाढ़ से 5 पंचायतों के 23 नए गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जिन नए इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचा है, उनमें बैकुंठपुर के श्यामपुर, देवकुली, हकाम, आजवीनगर, गोरैया स्थान, मंगलपुर, सिसई, चमनपुरा, गेनाडाबर, हरदिया, मंगरू छपरा, सफियाबाद, धर्मबारी, बिस्टौल, सबली, सिरसा धनटोली, चांदपुर शामिल हैं। इन गांवों से करीब 55 हजार की आबादी ने सुरक्षित जगहों पर पनाह ली है।
बारिश ने बढ़ाई परेशानी

फोटो बिहार के छपरा जिले के पानापुर की है। यहां चालों तरफ पानी भरा होने से मरीजों को गोद में उठाकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। गोपालगंज में बांध टूटने के बाद गंडक के वॉटर लेवल में कमी आई थी, लेकिन मंगलवार की दोपहर से यह फिर बढ़ने लगा। इससे लोगों की चिंता बढ़ गई है।
अंग्रेजों के जमाने में बने पुल की न मरम्मत हुई, न ऊंचाई बढ़ाई

फोटो झारखंड के रांची की है। स्वर्णरेखा नदी पर अंग्रेजों के जमाने में बने पुल की न तो मरम्मत हुई और न ही जरूरत के अनुसार उसकी ऊंचाई बढ़ाई गई है। स्थिति यह है कि हल्की बारिश में ही नदी पुल के ऊपर से बहने लगती है। इसमें कई बार लोग बह चुके हैं।
एक बैरक में 50 से अधिक जवान; न सोशल डिस्टेंसिंग, न मास्क

झारखंड में अभी तक करीब 500 पुलिसकर्मी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, इसके बावजूद रांची पुलिस लाइन में लापरवाही और बदइंतजामी का आलम कायम है। मीडिया में मामला आने के बाद सार्जेंट मेजर आरके रंजन ने हालात सुधारने की जगह पत्रकारों के पुलिस लाइन में घुसने पर ही रोक लगा दी। यह फरमान भी जारी कर दिया कि पुलिस लाइन की खबर लीक हुई तो पुलिसकर्मियों की खैर नहीं।
भास्कर ने पड़ताल में पाया कि यहां कोरोना ही नहीं यदि दूसरी कोई भी संक्रामक बीमारी फैल जाए तो कई जवानों की जान चली जाएगी। पेड़ के नीचे एक-एक बैरक में 50-50 से ज्यादा पुलिसकर्मी रहते हैं। न कोई सोशल डिस्टेंसिंग है और न ही मास्क।
भीमसेन को मनाने पहुंचे 84 गांववाले, सोश्ल डिस्टेंसिंग ताक पर

फोटो छत्तीसगढ़ के नकुलनार की है। यहां के कुआकोंडा परगना के 84 गांवों के लोग मंगलवार को भीमसेन पहाड़ पर पूजा करने पहुंचे। मान्यता है कि इससे अच्छी बारिश होती है। इस दौरान कुआकोंडा की प्रमुख देवी गंगादेई, लछनदेई, कोंडराज बाबा के साथ गांववाले पहाड़ पर पहुंचे। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का ध्यान नहीं रखा गया। यहां तक कि पुजारी ने लोगों को गले लगाकर आशीर्वाद भी दिया।
कोरोना की वजह से रद्द हुआ टूर्नामेंट

एक तरफ जहां भारतीय क्रिकेटर करोड़ों की कमाई करते हैं, वहीं भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान दिनेश सैन ने नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) में चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन किया है। उन्होंने 2015 से 2019 के बीच भारतीय टीम के लिए 9 मैच खेले थे। 35 साल के सैन पर पत्नी और एक साल के बच्चे की जिम्मेदारी है।
उधर, भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राजेंद्र सिंह धामी मनरेगा के तहत मजदूरी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले थे, लेकिन कोरोना की वजह से वह रद्द हो गया। वह युवा खिलाड़ियों को ट्रेनिंग भी देते थे।
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