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- Mayawati | BSP Party Chief Mayawati Under Pressure From CBI And BJP; Says Rajasthan Mla Wajib Ali
भरतपुर35 मिनट पहले
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भरतपुर जिले की नगर विधानसभा सीट से विधायक वाजिब अली।
- बसपा से कांग्रेस में आए नगर विधायक वाजिब अली ने बदली परिस्थिति में बसपा पर बोला हमला
(प्रमोद कल्याण)। बहुजन समाज पार्टी द्वारा कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों की सदस्यता समाप्त किए जाने संबंधी याचिका पर उच्च न्यायालय द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद नगर विधायक वाजिब अली ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती और उनके भाई के खिलाफ सीबीआई जांच कर रही है।
मायावती केंद्र सरकार के दबाव में हैं। इसलिए भाजपा के साथ मिलकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने का षड्यंत्र रच रही हैं। उन्होंने सवाल दागा, विलय को 10 माह हो चुके, लेकिन आज तक बसपा ने हमें कोई नोटिस नहीं दिया, किसी पदाधिकारी ने संपर्क नहीं किया। और अब कांग्रेस की अंदरूनी स्थितियां बदलीं तो भाजपा के इशारे पर हमारे खिलाफ बातें कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा अब भाजपा की बी-टीम बनकर काम कर रही है। प्रस्तुत है बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए नगर विधायक वाजिब अली से खास बातचीत –
प्रश्न. क्या विलय संवैधानिक है
वाजिब. बिल्कुल। पूरी प्रक्रिया के तहत हुआ है। स्पीकर को एप्लाई किया गया और मूंजरी मिली। पूरी संवैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई। मर्जर पूरा हो गया है। इसलिए अब इस पर सवाल उठाना ठीक नहीं।
प्रश्न. बसपा विलय को चुनौती दे रही है
वाजिब. सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है। मेरा सवाल यह है कि आखिर 10 माह तक पार्टी कहां रही। पार्टी ने पहले तो नोटिस देना तक उचित नहीं समझा। अब सरकार की स्थितियां विपरीत हुईं तो विलय को चुनौती दे रहे हैं। जबकि इलेक्शन कमीशन और स्पीकर राज्यसभा चुनाव के दौरान भी बसपा के दावे को नकार चुके हैं।
प्रश्न. बसपा सुप्रीमो और प्रदेशाध्यक्ष सबक सिखाने की बात कह रहे हैं
वाजिब. सबक तो उन्हें सीखना चाहिए। गरीब और दलितों के एजेंडे को छोड़कर भाजपा के दबाव में कांग्रेस सरकार के खिलाफ बयान दे रहे हैं। किसे नहीं मालूम कि बगावत कर रहे विधायक हरियाणा में भाजपा सरकार की मेहमान नवाजी में हैं। हरियाणा सरकार राजस्थान की जांच एजेंसियों को काम नहीं करने दे रही।
प्रश्न. न्यायालय ने बसपा की याचिका पर नोटिस जारी किया है
वाजिब. अभी नोटिस मिला नहीं है। मीडिया के जरिए पता चला है। लीगल इश्यू है। कानून के जानकारों से बात कर अपना पक्ष रखेंगे।
प्रश्न. आपने स्वार्थवश पार्टी और क्षेत्र को धोखा दिया
वाजिब. बसपा ने करीब 100 सीटों पर चुनाव लड़ा था। लगता था कि हम पावर आफ बैलेंस होंगे। पार्टी से ज्यादा हमारी जिम्मेदारी क्षेत्र की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने की है। इसलिए सभी विधायकों ने सरकार में शामिल होने का निर्णय लिया। अब हम कांग्रेस सरकार का हिस्सा हैं।
प्रश्न. क्या सरकार विश्वास मत ला सकती है
वाजिब. जरूरत पड़ी तो लाया जा सकता है। कई बार बिलों को पास कराने के लिए ऐसी प्रक्रिया की जरूरत होती है।
प्रश्न. कांग्रेस में शामिल होने का प्रतिफल कब मिलेगा
वाजिब. किसी प्रतिफल के लिए विलय नहीं हुआ। फिर भी कई बोर्डों में नियुक्तियां होनी हैं। मंत्री मंडल में जगह खाली होंगी। मंत्री मंडल का विस्तार होगा। ऐसे में मुख्यमंत्री गहलोत कोई जिम्मेदारी सौंपेंगे तो उसे स्वीकार किया जाएगा।
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