नई दिल्ली। कोरोना संकट की वजह से पिछले महीने दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियां थमने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। हालांकि, ओपेक देशों की ओर से क्रूड ऑयल का उत्पादन घटने के बाद कीमतों में फिर तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 39 डॉलर प्रति बैरल जा पहुंची है। भारत में 10 दिन में पेट्रोल की कीमतों में 5.47 रुपये, जबकि डीजल 5.80 रुपये प्रति लीटर मंहगा हो गया है।

इस मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। सोनिया गांधी ने लिखा कि संकट के वक्त में भी आपकी सरकार लगातार दाम बढ़ा रही है और इससे सैकड़ों करोड़ रुपये कमा चुकी है। सोनिया की मांग है कि सरकार तुरंत बढ़े हुए दाम वापस ले।

सोनिया गांधी ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि सरकार ने लॉकडाउन के बीच पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाकर करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये कमा लिए हैं। ऐसे वक्त में जब लोग संकट में हैं, तब इस तरह दाम बढ़ाना उनपर और भी संकट पड़ रहा है। ऐसे में सरकार का फर्ज बनता है कि लोगों के संकट को दूर करें।
गौरतलब है कि लॉकडाउन की वजह से दुनियाभर में लोग घरों में है। तेल की मांग में कमी की यह भी एक बड़ी वजह है। दुनिया के पास फिलहाल इस्तेमाल की ज़रूरत से ज़्यादा कच्चा तेल है और आर्थिक गिरावट की वजह से दुनियाभर में तेल की मांग में कमी आई है। तेल के सबसे बड़े निर्यातक ओपेक और इसके सहयोगी जैसे रूस, पहले ही तेल के उत्पादन में रिकॉर्ड कमी लाने पर राज़ी हो चुके है।

कैसे पानी से भी सस्ता हुआ कच्चा तेल-
मौजूदा समय में एक लीटर कच्चे तेल के दाम 39 डॉलर प्रति बैरल है। एक बैरल में 159 लीटर होते हैं। इस तरह से देखें तो एक डॉलर की कीमत 76 रुपये है। इस लिहाज से एक बैरल की कीमत 2964 रुपये बैठती है। वहीं, अब एक लीटर में बदलें तो इसकी कीमत 18.64 रुपये के करीब आती है। जबकि देश में बोतलबंद पानी की कीमत 20 रुपये के करीब है।

ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा कि मुझे समझ नहीं आ रहा है, जब देश में इतनी नौकरियां जा रही हैं और लोगों को जीने तक का संकट आ रहा है, तब सरकार इस तरह पैसा क्यों बढ़ा रही है। आज क्रूड ऑयल का दाम लगातार घट रहा है और सरकार ने पिछले 6 साल में लगातार दाम बढ़ाया ही है।

सोनिया गांधी ने लिखा कि सरकार की ओर से पिछले 6 साल में पेट्रोल पर 258 फीसदी और डीजल पर 820 फीसदी एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई है, जिससे करीब 18 लाख करोड़ रुपये कमा लिए हैं। सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वो तुरंत इन बढ़े हुए दामों को वापस लें और आम लोगों को राहत पहुंचाएं।

बता दें कि पिछले दस दिनों से हर रोज देश में पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी की जा रही है। मंगलवार को भी पेट्रोल में 47 पैसे और डीजल में 75 पैसे की बढ़ोतरी की गई। इसी के साथ दिल्ली में अब पेट्रोल का दाम 76.73 पैसे और डीजल का दाम 74.62 पैसे हो गई है।
पेट्रोल-डीज़ल क्यों लगातार महंगा हो रहा है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेट्रोल के दाम कई चीजों से तय होते हैं। इसमें एक कच्चा तेल भी है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद भारत में उस अनुपात में पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों नहीं घटतीं? इसकी दो बड़ी वजह हैं।

पहली वजह- भारत में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला भारी टैक्स है। वहीं, दूसरी वजह डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी है। इस समय दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत एक्स फैक्ट्री कीमत या बेस प्राइस 22.11 रुपये है। इसमें केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी के रूप में 32.98 रुपये, ढुलाई खर्च 33 पैसे, डीलर कमीशन 3.60 पैसे और राज्य सरकार का वैट 17.71 रुपये होता है। राज्य सरकार का वैट डीलर कमीशन पर भी लगता है। कुल मिला कर पेट्रोल की कीमत 76.73 रुपये हो जाती है।

दूसरी वजह- रुपये की कमजोरी, इकोनॉमी में लगातार गिरावट के साथ ही हमारा रुपया भी लगातार कमजोर होता जा रहा है। दिसंबर 2015 में हम एक डॉलर के बदले 64.8 रुपये अदा करते थे। लेकिन अब ये 76 रुपये से ज्यादा हो गया हैं। सीधे-सीधे 15 फीसदी अधिक कीमत देनी पड़ रही है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय क्रूड हमारे लिए सस्ता होकर भी महंगा पड़ रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए यह बोझ बना हुआ है।
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