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नई दिल्ली18 मिनट पहले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजघाट पर कहा कि स्वच्छ भारत अभियान से हमारे व्यवहार में स्थायी बदलाव आया है।
- प्रधानमंत्री ने कहा- अफसर अपने-अपने जिलों के गांवों में कम्युनिटी टॉयलेट बनाने पर जोर दें
- ‘बाहर भी निकलना है और कोरोना से भी बचना है, इसके लिए मास्क पहनें और दो गज की दूरी रखें’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को स्वच्छ भारत मिशन के तहत राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि 60 महीने में करीब-करीब 60 करोड़ भारतीय शौचालय की सुविधा से जुड़ गए। आज से 15 अगस्त तक एक हफ्ते हम देश में गंदगी के खिलाफ अभियान चलाएं। इसका नाम होगा गंदगी भारत छोड़ो सप्ताह। सभी अफसरों से अपील है कि वे अपने-अपने जिलों के गांवों में कम्युनिटी टॉयलेट बनाने का अभियान चलाएं।
मोदी ने कार्यक्रम में मौजूद बच्चों से कहा कि मेरे सामने लघु भारत है। अलग-अलग राज्यों और वहां की वेशभूषा में आप सभी बच्चों से बात करके आज पूरे हिंदुस्तान के साथ बात कर रहा हूं। आप सभी मास्क पहनकर आए हैं और दो गज की दूरी भी रखी है। आप जिस तरह नियमों का पालन कर रहे हैं उसे मन को आनंद मिल रहा है। कोरोना से लड़ने का यही हथियार है। हमें बाहर भी निकलना है और कोरोना से बचना भी है। इसके लिए मास्क पहनना है, दो गज की दूरी रखनी है और कहीं पर भी थूकने से बचना है।
मोदी के संबोधन की मुख्य बातें-
- ‘हमारे बाल मित्र बहुत बड़ा बदलाव स्वच्छता के क्षेत्र में ला सकते हैं। इस पूरे आंदोलन में आप जैसे बाल मित्र मेरे सबसे बड़े साथी हैं। बालकों ने जागरुकता के साथ इस काम को किया है। पिछले साल सभी गांवों ने खुले में शौच मु्क्त घोषित किया था। आप ही बड़ों को रास्ता दिखा सकते हैं कि साफ-सफाई का ध्यान रखें।’
- ‘गांधी जी की अगुवाई में आजादी के लिए विराट आंदोलन शुरू हुआ था। अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा था। ऐसे ऐतिहासिक दिवस पर राजघाट के पास स्वच्छता केंद्र का उद्घाटन बहुत ही प्रासंगिक है। ये बापू के प्रति 130 करोड़ भारतीयों की श्रद्धांजलि है। वे स्वराज में स्वच्छता को भी देखते थे। स्वच्छता के प्रतीक बापू के आग्रह को पूरी तरह समर्पित एक आधुनिक इमारत का नाम अब राजघाट के साथ भी जुड़ रहा है।’
- ‘जब मैं इस केंद्र के भीतर था तो करोड़ों भारतीयों के प्रयासों का संकलन देखकर सभी स्वच्छताग्राहियों को नमन कर रहा था। 6 साल पहले शुरू हुए मिशन के चित्र सामने आते गए।’ बता दें कि इसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने 10 अप्रैल 2017 को महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी समारोह के दौरान की थी। प्रधानमंत्री के ट्विटर हैंडल से इसकी जानकारी दी गई।
- ‘यहां स्वच्छता की हमारी कोशिशों को टेक्नोलॉजी के माध्यम से दिखाया गया है। स्वच्छता रोबोट बच्चों के लिए बहुत प्रिय है। स्वच्छता के मूल्यों से यही जुड़ाव देश-दुनिया से आने वाला हर व्यक्ति यहां बार-बार आना पसंद करेगा। गांधी जी के आदर्शों को अपनाने के लिए आज पूरी दुनिया आगे आ रही है।’
- ‘गांधी जी के प्रिय भजन को अनेक देशों के गायकों ने मिलकर गाया। भारतीय भाषा के इस गीत को सुंदर तरीके से गाकर नया रिकॉर्ड बना दिया। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विशेष आयोजन से लेकर बड़े-बड़े देशों में गांधीजी की शिक्षाओं को याद किया।’
- ‘किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि एक बेहद शक्तिशाली सत्ता तंत्र से मुक्ति का रास्ता स्वच्छता में भी हो सकता है। गांधीजी ने इसे जनआंदोलन बना दिया। वे कहते थे कि स्वराज सिर्फ साहसी और स्वच्छ जन ही ला सकते हैं। गंदगी गरीब परिवारों का सबसे ज्यादा नुकसान करती है।’
- ‘गांधीजी जानते थे कि भारत को जब तक गंदगी में रखा जाएगा, तब तक भारतीय जनमानस में आत्मविश्वास पैदा नहीं हो पाएगा। इसलिए साउथ अफ्रीका से लेकर चंपारण और साबरमती तक उन्होंने स्वच्छता को ही अपना आंदोलन बनाया।’
- ’60 महीने में करीब-करीब 60 करोड़ भारतीय शौचालय की सुविधा से जुड़ गए। इसका मतलब है कि आत्मविश्वास से जुड़ गए। इसकी वजह से देश की लाखों बेटियों को पढ़ाई का भरोसा मिला। लाखों गरीब बच्चों को बीमारियों से बचने का उपाय मिला। करोड़ों गरीबों, दलितों, शोषितों, वंचितों को समानता का अधिकार मिला।’
- ‘स्वच्छ भारत अभियान से हमारी सामाजिक चेतना, हमारे व्यवहार में भी स्थायी परिवर्तन आया है। बार-बार थूकने से बचना हो, कचरे को सही जगह फेंकना हो, ये सभी बातें हम सामान्य भारतीयों तक पहुंचा पाए हैं। अब घर पर या सड़क पर गंदगी फैलाने वालों को कोई न कोई तो टोकता है। ये काम सबसे अच्छे तरीके से आप जैसे बाल मित्र, हमारे देश के बच्चे करते हैं।’
- ‘बच्चों में पर्सनल और सोशल हाइजीन की जो चेतना पैदा हुई उसका लाभ कोरोना से लड़ने में भी मिल रहा है। ये स्थिति 2014 से पहले आती तो क्या स्थिति होती। लॉकडाउन जैसी व्यवस्थाएं संभव हो पाती? जब भारत की 60% आबादी खुले में शौच के लिए मजबूर थी।’
- ‘स्वच्छता का अभियान एक सफर है जो जीवनभर चलता रहेगा। देश को ओडीएफ के बाद अब ओडीएफ प्लस बनाने के लक्ष्य पर काम चल रहा है। कचरे का मैनेजमेंट बेहतर बनाना है। कचरे से कंचन बनाने का काम तेज करना है। इसी सोच के साथ बीते 6 साल से भारत में एक व्यापक भारत छोड़ो अभियान चल रहा है। गरीबी भारत छोड़ो, खुले में शौच की मजबूरी भारत छोड़ो, सिंगल यूज प्लास्टिक भारत छोड़ो, भ्रष्टाचार, आतंकवाद और हिंसा भारत छोड़ो।’
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