कोलकाता। भारत-बांग्लादेश सीमा पर मवेशी तस्करी के संदेह में गोली लगने से एक मासूम किशोर की मौत हो गयी। सोमवार को इस घटना को केंद्र कर कूचबिहार जिले के तुफानगंज इलाके के बालभुत गांव में तनाव व्याप्त हो गया।
सुबह से ही इलाके प्रदर्शन किये जा रहे हैं। इलाके में तनाव को देखते हुए बड़े पुलिस बल ने गश्त के बावजूद रैफ को भी तैनात किया गया है। हालांकि, अब तक कोई संघर्ष की घटना नहीं घटी है।
पता चला है कि जिलाधिकारी और एसडीओ ने दोपहर के समय इलाके में गए और प्रदर्शन कर रहे लोगों से बात की। जिला प्रशासन के सूत्रों के अनुसार बीएसएफ अधिकारियों की बैठक के लिए भी उन्हें बुलाया गया था।
दरअसल रविवार शाम बीएसएफ जवानों को खबर मिली कि तस्कर रात के अंधेरे में बांग्लादेश में तस्करी के उद्देश्य से बालभूत इलाके में सैकड़ों मवेशियों को इकट्ठा किया है। सूचना के आधार पर, बीएसएफ टीम ने शाम को गांव में अभियान चलना शुरू किया।
जैसे ही बीएसएफ जवान गांव में दाखिल हुए, उन पर बम फेंके जाने लगे। इसका उद्देश्य बीएसएफ जवानों को रोक कर रखना था। लेकिन हमला होने के बावजूद, बीएसएफ की 62वीं बटालियन के जवान आगे बढ़ते गए। जवानों ने भी तस्करों को लक्ष्य कर गोली चलनी शुरू की।
उसी समय स्थानीय निवासी शाहीनूर हक नामक किशोर अपने घर के छज्जे पर खड़ा था। जवानों ने उसे तस्कर समझ कर गोली चला दी। जिसके बाद किशोरी रक्तरंजित हालात में जमीन पर गिर पड़ा और उसकी मौके पर ही मौत हो गयी।
घटना के बाद ग्रामीणों ने सोमवार सुबह से ही किशोर के शव को रखकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों की मांग है की आरोपी जवानों को दंडित किया जाय और किशोर के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए। इन मांगों को लेकर गांव में प्रदर्शन किये गए।
एक बड़ी पुलिस फोर्स गांव में जाने के बावजूद किशोरी का शव बरामद नहीं कर सकी। इस बीच बीएसएफ के जवान भी इस गांव में प्रवेश नहीं करना चाहते हैं। उनका दावा है कि ग्रामीणों का एक बड़ा हिस्सा पशु तस्करी में शामिल है।
इसके कारण रविवार शाम को बीएसएफ जवानों पर हमले की घटना घटी। जवानों का कहना है कि तस्कर गांव में ही रहते हैं इसलिए तस्कर बमबारी के दौरान किसी के घर में घुसने में सक्षम हुए है।
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