Janmashtami Update, Puja Samagri Business In Bharatpur Mathura Vrindavan On Krishna Janmashtami 2020 Celebrations | बडे़ मंदिर बंद हैं तो क्या घरों में पहले से ज्यादा उत्साह, ठाकुरजी की पोषाक और शृंगार के कारोबार को लगे पंख

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भरतपुर/ मथुरा12 मिनट पहले

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मथुरा। जम्माष्टमी के मोके पर मथुरा में एक दुकान पर रखे भगवान कृष्ण-राधा के शो पीस। इस बार कृष्ण शृंगार का कारोबार आधा भी नहीं हुआ।

  • मथुरा-वृंदावन में ठाकुरजी के शृंगार सामग्री का कारोबार 30 करोड़ से ज्यादा का
  • इस बार कारोबार 50 प्रतिशत से भी कम रहा लेकिन रोजी-रोटी चल निकली

मंदिर भले ही बंद थे, लेकिन प्रत्येक घर आज मंदिर से बढ़कर थे। क्योंकि कान्हा के जन्म के वह सभी अनुष्ठान, मनोहर और कार्यक्रम हुए, जिन्हें निहारने के लिए ब्रजवासी श्रीकृष्ण जन्मस्थान, द्वारिकाधीश, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर के लिए जाते थे। यात्री थे नहीं और बाजार बंद थे लेकिन गलियों और मोहल्लों में बने मंदिरों में बंदिशें नहीं थीं।

मथुरा के पोतरा कुंड, राजाधिराज बाजार, राधा निवास सहित अनेक गलियां, बाजार और मोहल्लों में बने छोटे-छोटे मंदिरों में उत्साह और उल्लास था। यद्यपि बाहर का तीर्थयात्री नाममात्र का है, लेकिन स्थानीय श्रद्धालुओं से यह मंदिर आबाद हैं। मदनमोहन जी मंदिर के पुजारी गोपेश्वर ने बताया कि अन्य दिनों के मुकाबले आसपास के लोगों ने मंदिर में ज्यादा शिरकत की और उल्लास एवं सहयोग दिया।

कृष्ण को घर ले जाने को आतुर। भरतपुर में एक दुकान पर कृष्ण के शोपीस को देखते ग्राहक।

कोरोना की बंदिशों से आहत लोगों ने दोपहर में सजावट की और अभिषेक किया। यद्यपि सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखा। घरों में उल्लास के साथ जन्मोत्सव मनाया। ठाकुरजी को दुगने उत्साह से सजाया-संवारा। इसलिए दो दिन में पोषाक कारोबार में एकाएक तेजी आई है। कारोबारी संजय गुप्ता कहते हैं, कोरोना के कारण लग रहा था कि इस बार मंदी रहेगी, लेकिन लोगों के उत्साह ने मंदी को दरकिनार कर दिया।

मथुरा में एक दुकान में रखी कृष्ण शृंगार की सामग्री।

पोषाक, मुकुट, कुंडल, माला, तिलक, अंखियन, मंजीर, बांसुरी, फूलबंगला, घंटी, झालर, पूजा थाली, ठाकुरजी के कूलर, एसी सहित बच्चों की श्रीकृष्ण पोशाक के कारोबार ने आर्थिक सन्नाटे को तोड़ा है। कारोबारी ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि मथुरा-वृंदावन में पोषाक एवं ठाकुरजी के श्रंगार सामग्री का कारोबार करीब 30 करोड़ रुपए से ज्यादा का है। तीन महीने पहले से काम प्रारंभ हो जाता है, लेकिन लॉकडाउन के कारण ठीक से तैयारी नहीं हुई। शुरुआती दौर में डिमांड भी कम थी, लेकिन बाद में जो ग्राहकी आई उसने पुराना स्टाक भी खत्म कर दिया। यद्यपि कारोबार पिछले साल के मुकाबले 50 प्रतिशत से भी कम है, लेकिन रोटी-रोटी तो चल ही गई है।

भगवान श्री कृष्ण के शोपीस।

काम्यवन शोध संस्थान के निदेशक डॉ. रमेशचंद मिश्र का कहना है कि जीवन को उल्लास से जीने की भारतीयों में फितरत है। इसलिए तो सात वार नौ त्यौहार की कहावत बनी है। सामाजिक संरचना की जानकार डॉ. सुधा सिंह का कहना है कि कोरोना के कारण बदले हालात में लोग भीड़ के बजाए सीमित और सुरक्षित इलाके में त्योहार को पहले से ज्यादा उत्साह से मनाएंगे, क्योंकि कोरोना बंदिश से पैदा उदासी को भी तो उसे आनंद में बदलना है। इसलिए घर एक मंदिर है कहा गया है।

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