Krishna Janmashtami 2020; Live Jaipur Govind Devji Temple celebration without devotees Dharshan Arranged | गोविंद देव जी मंदिर में 31 लीटर दूध और 21 किलो दही से गोविंदाभिषेक के साथ हुआ कृष्ण जन्म

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जयपुर19 मिनट पहले

ढोल, नगाड़ों और जयकारों के बीच गोविंद देव जी मंदिर में कृष्ण जन्म हुआ।

  • मंदिर में एंट्री की सभी जगहों को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया गया
  • यह पहला मौका है, जब ठाकुरजी के दरवाजे भक्तों के लिए बंद रहे

जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में निश्चित समय पर ढोल, नगाड़ों और जयघोष के बीच नंदलाला का जन्म हुआ। पट खुलते ही भगवान कृष्ण का गोविंदाभिषेक किया गया। इससे पहले दिन भर मंदिर में व्रत कथा और पाठ चलते गए। समय-समय पर आरती की गई। हर साल की तरह इस साल भी यहां मंदिर में सजावट की व्यवस्था की गई है। लोगों ने लाइव इसके दर्शन किए। बुधवार सुबह मंगला आरती के बाद पंचामृत अभिषेक से जन्माष्टमी की शुरुआत हुई। जिसके बाद धूप आरती की गई।

कृष्ण जन्माष्टमी की अभिषेक झांकी।

कोरोना के चलते मंदिर में लोगों का प्रवेश निषेध रहा, लेकिन मंदिर परिसर में सभी कार्यक्रम निश्चित समय पर किए गए। मंदिर में एंट्री की सभी जगहों को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया गया। यहां भगवान के अभिषेक के लिए 31 लीटर दूध, 21 किलो दही, 2 किलो घी, 10 किलो बूरा और 2 किलो शहद अर्पण किया गया।

वृत कथा और पाठ किए गए।

लोग दर्शन करने मंदिर पहुंचे लेकिन पुसिस ने वापस लौटाया।

ऐसा रहा कार्यक्रम

सबसे पहले 12 अगस्त को सुबह मंगला आरती के बाद भगवान का पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद उन्हें पीले वस्त्र धारण करवाए गए। रात 10 से 11 बजे तक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा का पाठ किया गया। जिसके बाद रात 12 बजे 31 तोपों की सलामी के साथ भागवान कृष्ण का गोविंदाभिषेक हुआ। इसके बाद 13 अगस्त को मंदिर में नंदोत्सव मनाया जाएगा।

मंदिर परिसर पूरी तरह खाली रहा। पूजा-अर्चना की गई।

मंदिर परिसर को सजाया गया।

यहां भी मनी जन्माष्टमी

गोविंद देव जी के अधीन राधा माधव जी, नटवर जी, श्री गोपाल जी, मुरली मनोहर जी मंदिर, स्वामीनारायण मंदिर, मानसरोवर स्थित इस्कॉन मंदिर, जगतपुरा स्थित बलराम श्री कृष्ण मंदिर, चौड़ा रास्ता के राधा दामोदर जी में भी जन्माष्टमी मनाई गई।

इस मन्दिर का निर्माण 1735 में हुआ था।

राजा जयसिंह ने बनवाया था मंदिर

गोविंद देवजी जयपुर के राज परिवार के इष्ट देव हैं। शहर के संस्थापक जयसिंह और उसके बाद के सभी शासकों ने गोविंद देवजी की भक्ति की है। इस मन्दिर का निर्माण 1735 में हुआ था। सवाई जयसिंह ने आज के जयनिवास में गोविंद देवजी की प्रतिमा को रखवाया और 1715 से 1735 तक गोविंद देवजी जयनिवास में ही रहे। कहानी यह भी है कि जयसिंह को एक बार सपना आया जिसमें गोविंद देवजी ने उन्हें मन्दिर बनाकर वहां स्थापित करने का आदेश दिया।

कहते हैं कि सपने में जिस प्रकार कहा गया उसी हिसाब से देवस्थान बनाया गया। मन्दिर जो बना वह महल जैसा था। गोविंद देवजी के सामने विशाल मन्दिर ऐसा बना कि सोने से पहले और प्रातः उठने पर महाराजा अपने शयन कक्ष से ही सीधे गोविंद देवजी के दर्शन करते और आशीर्वाद लेते। आज भी मंदिर की भव्यता किसी राजमहल से किसी भी अंश में कम नहीं है।

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