Haryana news Fire in Faridabad local body office | 50 करोड़ के कथित घोटाले की चल रही थी जांच, इससे पहले ही निगम कार्यालय में लगी आग, रिकॉर्ड हुआ राख

फरीदाबाद10 मिनट पहले

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फरीदाबाद के नगर निगम कार्यालय में आग लगने के बाद ऐसी है दफ्तर की हालत।

  • साजिश या फिर हादसा इसके लेकर कमिश्नर ने जांच कमेटी की गठित
  • तीन सदस्यों की कमेटी सोमवार तक सौंपेगी रिपोर्ट

फरीदाबाद के नगर निगम मुख्यालय में 50 करोड़े के कथित घोटाले की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि इससे पहले ही कार्यालय में रहस्यमय तरीके से रविवार को आग लग गई। इस आग में अकाउंट ब्रांच का रिकॉर्ड व अन्य सामान जलकर खाक हो गए। अचानक लगी इस आग के बाद चर्चाएं गर्म है कि इसके पीछे 50 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच पर पर्दा डालने की साजिश है। निगम कमिश्रर डॉ. यश गर्ग ने इस अग्निकांड की जांच के लिए निगम अधिकारियों की तीन सदस्य एक कमेटी गठित कर की है। जांच कमेटी सोमवार तक इस पर अपनी रिपोर्ट कमिश्रर को सौंपेगी।

रविवार सुबह पौने आठ बजे लग गई आग
रविवार की सुबह करीब पौने आठ बजे अचानक अकाउंट ब्रांच में आग लग गई। दमकल विभाग को करीब आठ बजे सूचना मिली। मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियों ने करीब एक घंटे में आग पर काबू पाया। फायर ऑफिसर आरके खटाना ने बताया कि आग लगने से अंदर रखे सामान व फर्नीचर जलकर खाक हो गए हैं। लेकिन पानी की बौछार से अंदर रखे सारे कागजात भीग गए हैं। प्रारंभिक जांच में शार्ट सर्किट से आग लगने की बात सामने आ रही है। फिलहाल अकाउंट ब्रांच को सील कर बंद कर दिया गया ताकि ये पता लगाया जा सके कि आग कैसे लगी और कौन कौन से रिकॉर्ड जले हैं।

50 करोड़ घोटाले की ये है कहानी
6 जुलाई को वॉर्ड नंबर 37 के पार्षद दीपक चौधरी ने आरोप लगाया था कि उन्होंने वर्ष 2017 से लेकर 2019 तक विकास कार्यों का ब्यौरा अकाउंट ब्रांच से मांगा था। जिसमें सभी वार्डों में कराए गए विकास कार्यों का ब्यौरा और ठेकेदारों को भुगतान किए गए पैसों की जानकारी मांगी थी। उन्हें ब्यौरा उपलब्ध करा दिया गया। उसका अध्ययन करने के बाद पार्षद ने पाया कि उनके वॉर्ड में 27 ऐसे कार्य हुए हैं जिनमें 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान ठेकेदार को किया गया है। उन्होंने दूसरे वार्डों के पार्षदों से संपर्क कर ब्यौरा शेयर किया और जानकारी मांगी तो पता चला कि 40 वॉर्ड में से 10 वॉर्ड ऐसे हैं जहां कोई काम नहीं हुआ लेकिन ठेकेदार को पेमेंट भुगतान किया गया है। ये रकम करीब 50 करोड़ रुपये तक है।

जांच की मांग
उधर घोटाले का आरोप लगाने वाले निगम पार्षदों ने इसे साजिश के तहत आग लगाए जाने का आरोप लगाया है ताकि घोटाले पर पर्दा डाला जा सके। उनका आरोप है कि विकास कार्यों से संबंधित फाइलों को ही इसमें जलाया गया है।

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