नई दिल्ली। यह खबर देश के किसान क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए है। जिन्होंने खेती-किसानी के लिए बैंकों से लोन ले रखा है। केसीसी धारकोंं को बैंक से लिए गए कृषि कर्ज को 31 अगस्त तक वापस करना होगा। अगर वो अगले स किसान क्रेडिट कार्ड पर लिया गया पैसा बैंक को वापस नहीं करते हैं तो उन्हें 4 की जगह 7 फीसदी ब्याज देना पड़ेगा। खेती-किसानी के लोन पर सरकार ने 31 अगस्त तक पैसा जमा करने की मोहलत दी है।

आमतौर पर केसीसी पर लिए गए लोन को 31 मार्च तक वापस करना होता है. उसके बाद किसान फिर अगले साल के लिए पैसा ले सकता है। जो किसान समझदार हैं वो समय पर पैसा जमा करके ब्याज में छूट का लाभ उठा लेते हैं। दो-चार दिन बाद फिर से पैसा निकाल लेते हैं। इस तरह बैंक में उनका रिकॉर्ड भी ठीक रहता है और खेती के लिए पैसे की कमी भी नहीं पड़ती। अब और छूट मिलने की संभावना कम ही है, क्योंकि लॉकडाउन खत्म हो गया है। कृषि गतिविधियां भी पटरी पर आ गई हैं।
बता दें की केंद्र सरकार के वो अध्यादेश, जिनके खिलाफ किसान-व्यापारी दोनों उठा रहे हैं आवाज मोदी सरकार ने लॉकडाउन को देखते हुए इसे 31 मार्च से बढ़ाकर पहले 31 मई किया था। बाद में इसे और बढ़ाकर 31 अगस्त तक कर दिया गया. इसका मतलब यह है कि किसान केसीसी कार्ड के ब्याज को सिर्फ 4 प्रतिशत प्रति वर्ष के पुराने रेट पर 31 अगस्त तक भुगतान कर सकते हैं। बाद में यह महंगा पड़ेगा।

2.5 करोड़ और किसानों को लोन देने का प्लान
पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम और किसान क्रेडिट कार्ड योजना के लाभार्थियों के बीच करीब 2.5 करोड़ लोगों का अंतर है। इन किसानों को केसीसी उपलब्ध करवाने की तैयारियों में सरकार जुट गई है।
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी के मुताबिक ‘ढाई करोड़ किसानों को 2 लाख करोड़ रुपये का आसान और रियायती क्रेडिट उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि कोई भी किसान साहूकारों से लोन न ले क्योंकि उसकी ब्याज दर काफी अधिक होती है और किसान इस कर्ज के दुष्चक्र से बाहर नहीं निकल पाता। जबकि सरकारी लोन लेने पर सालाना सिर्फ 4 फीसदी ब्याज लगता है जो देश में किसी भी लोन पर सबसे कम दर है। अभी करीब आठ करोड़ केसीसी धारक हैं।
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