Without a mask, the young man was not allowed to go to the bank, if there was no money to buy, he wore a sack of cement with a mask. | छत्तीसगढ़ के लोरमी में मनियारी नदी उफान पर, लोग शॉर्टकट के चक्कर में जान जोखिम में डालकर पुल पार कर रहे

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22 मिनट पहले

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छत्तीसगढ़ के लोरमी जिले में मनियारी नदी उफान पर है। यहां लपटी घाट पर पुल के ऊपर से पानी बह रहा है। जल्दीबाजी के चक्कर में फुटूपारा, शिवहरि, लपटी, बंधी, रेंहूंटा गांव जाने वाले मजदूर इसी रास्ते से लोरमी जा रहे हैं।

अधन्नपुर गांव में कीचड़ भरा रास्ता

मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के अंबाह तहसील से सात किमी दूर अधन्नपुर गांव में पक्की सड़क नहीं है। बारिश के सीजन में यहां रास्तों कीचड़ हो जाती है। यहां कोई कोई वाहन नहीं आ सकता। ऐसे में गुरुवार को एक मरीज को खटिया पर लिटाकर सिविल अस्पताल ले जाना पड़ा।

पैसरा टोला के लोगों ने लकड़ी का पुल बनाया

हजारीबाग जिले के गांव बाली टोला पैसरा के लोगों को बारिश के मौसम में गांव से बाहर जाने में हर साल परेशानी होती है। दरअसल, यहां बने तालाब का बैक वॉटर उनका रास्ता रोक देता है। प्रशासन से गुहार लगाकर थक चुके इन लोगों ने समस्या खुद की दूर करने की ठानी और बैक वॉटर पर बांस-बल्ली से करीब 200 मीटर लंबा पुल बना दिया।

श्रमदान कर डायवर्जन पर बनाया पुल

बिहार के मोतिहारी जिले के बरवाडीह नहर पर बने डायवर्जन पर गुरुवार शाम गांव के लोगों ने लकड़ी का पुल बनाने का काम पूरा कर दिया। इससे लोगों को राहत मिली है। डायवर्जन टूट जाने के बाद करीब डेढ़ महीने से नाव वाले उन्हें पार उतारने के लिए प्रति व्यक्ति 20 से 30 रुपए ले रहे थे। इससे गरीबों को काफी परेशानी हो रही थी।

खजुराहो में 24 घंटे में 6.6 इंच बारिश

बुंदेलखंड में मानसून मेहरबान है। बीते 24 घंटे में खजुराहो में 6.6 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। धसान नदी पर बने पहाड़ी बांध, बान सुजारा बांध और लहचूरा बांधों के कई गेट खोल कर पानी निकाला गया। पन्ना रोड पर फोरलेन रोड निर्माण के दौरान पीएनसी कंपनी की ओर से गठेवरा के पास नाले पर बनाया गया डायवर्जन मार्ग बह गया। जिससे करीब चार घंटे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।

वन्यजीवों के लिए कोरोना का दौर सुकून भरा

कोरोना वायरस के कहर ने लोगों के जीवन में भले ही बेचैनी पैदा कर दी, लेकिन वन्यजीवों के लिए यह समय सुकून भरा है। यह पहला मौका है जब सरिस्का पार्क पर्यटकों के लिए लंबे समय तक बंद रहा है। सरिस्का बाघ परियोजना में इंसानी दखल कम रहने से वन्यजीवों के स्वभाव में भी बदलाव देखने को मिला है। इंसानी आवाजाही और पर्यटकों की गाड़ियों पर रोक लगने के बाद जंगल में चीतल, सांभर, जंगली सुअर समेत अन्य वन्यजीव यहां बेफिक्र घूम रहे हैं।

नदी में अठखेलियां कर रहीं पानी की लहरें

लगातार हो रही बारिश के कारण रांची की हरमू नदी एक बार फिर से मुस्कुरा उठी है। लहरें अठखेलियां करती नजर आ रही हैं। सौंदर्यीकरण पर करीब 80 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी कुछ समय पहले तक यह नदी गंदगी से भरी थी। इसमें छह बड़े नालों का पानी आता है। नदी के करीब से गुजरने पर बदबू आती थी। आज इसका पानी साफ दिखाई दे रहा है। इसके किनारे लगे पेड़ इसकी खूबसूरती बढ़ा रहे हैं।

कश्मीर नहीं, ये लातेहार का नेतरहाट है

झारखंड का कश्मीर कही जाने वाली लातेहार की पहाड़ी नगरी नेतरहाट का मौसम तो सालभर सुहाना रहता है, लेकिन बरसात के दिनों में इसकी खूबसूरती और भी बढ़ जाती है। बादल आसमान से उतरकर जमीन पर आ जाते हैं। नेतरहाट की सड़कों पर बादल के बीच से होकर लोग गुजरते हैं। यह दिलकश नजारा पूरे नेतरहाट की वादियों में देखा जाता है।

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