Consumer News In Hindi : Income Tax ; Invest in these schemes including PPF, ELSS or term life insurance by June 30 for tax saving | टैक्स सेविंग के लिए 30 जून तक पीपीएफ, ELSS या टर्म लाइफ इंश्योरेंस सहित इन स्कीम्स में करें निवेश

  • कई योजनाओं में निवेश करने पर 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक टैक्स की छूट ली जा सकती है
  • टैक्स छूट के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना या अटल पेंशन योजना में भी निवेश कर सकते हैं

दैनिक भास्कर

Jun 23, 2020, 12:55 PM IST

नई दिल्ली. कोरोना वायरस के चलते सरकार ने टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट के लिए समय सीमा 30 जून तक बढ़ा दी है। ऐसे में अगर आपने अभी तक कहीं निवेश नहीं किया है तो PPF, ELSS या टर्म लाइफ इंश्योरेंस सहित कई तरह की योजनाओं में निवेश करते टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं। अगर आप पुराने टैक्स सिस्टम को चुनते हैं तो इन योजनाओं में निवेश के जरिए 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक टैक्स की छूट ली जा सकती है। सीए अभय शर्मा (पूर्व अध्यक्ष इंदौर चार्टर्ड अकाउंटेंट शाखा) टैक्स बचत के लिए कुछ लोकप्रिय योजनाओं के बारे में बता रहे हैं।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ)
आप अपने जीवनसाथी या बच्चों के नाम से बैंक या पोस्ट ऑफिस में खोले गए पीपीएफ अकाउंट में निवेश कर टैक्स में राहत पा सकते हैं। अगर आप पीपीएफ में निवेश माता-पिता या भाई-बहनों के अकाउंट में करते हैं तो आपको टैक्स में कोई लाभ नहीं मिलता। इसमें निवेश के वक्त टैक्स लाभ, ब्याज पर टैक्स लाभ और मैच्योरिटी पर रकम निकासी पर भी टैक्स छूट मिलती है। इस पर दिए जाने वाले ब्याज के बारे में केंद्रीय वित्त मंत्रालय हर तिमाही में दरें घोषित करता है।

कर्मचारी भविष्य निधि / स्वैच्छिक भविष्य निधि (ईपीएफ या वीपीएफ)
अगर आप सैलरी पाने वाले इम्पलॉई हैं, तो निवेश के इस विकल्प (पीएफ) में आप पहले से ही निवेश कर रहे हैं। हर महीने आपको मिलने वाले वेतन से पहले ही आपके ईपीएफ अकाउंट में रकम जमा हो जाती है। इसे आपके वेतन से काटकर इसमें जमा कराया जाता है। अगर आप अपनी सैलरी स्लिप की जांच करें तो आपको पता लग जाएगा कि आप हर महीने ईपीएफ में कितना निवेश कर रहे हैं।

इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस)
ईएलएसएस वास्तव में तीन साल की लॉक इन अवधि वाले इक्विटी म्यूचुअल फंड होते हैं। ईएलएसएस में निवेश करने पर आप तीन साल के अंदर इस रकम को निकाल नहीं सकते। बहुत से लोग ईएलएसएस को टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड  के नाम से भी जानते हैं।

यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप)
यूलिप जीवन बीमा योजना और निवेश का एक मिला-जुला रूप है। इसके लिए चुकाए जाने वाले प्रीमियम में एक हिस्सा जीवन बीमा कवर के लिए, जबकि बचा हुआ हिस्सा रिटर्न के लिए किसी फंड में निवेश कर दिया जाता है। यूलिप में चुकाए गए प्रीमियम की पूरी रकम पर इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है।

टर्म लाइफ इंश्योरेंस
टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान के लिए चुकाए गए प्रीमियम की रकम पर आप इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं।

पारंपरिक जीवन बीमा/मनी बैक योजना
आप जीवन बीमा या मनी बैक प्लान में चुकाए गए प्रीमियम पर भी सेक्शन 80C के तहत टैक्स लाभ पा सकते हैं। इसमें भी एक शर्त यह है कि अगर आप कम से कम दो साल के लिए प्रीमियम का भुगतान नहीं करते तो टैक्स बचत का लाभ वापस ले लिया जाएगा।

5 साल के बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट
निवेश के इस विकल्प को आम तौर पर टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जाना जाता है। इस फिक्स्ड डिपॉजिट की अवधि 5 साल की होती है। इसका मतलब यह है कि इस तरह के फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश को आप पांच साल से पहले भुना नहीं सकते। इस पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स चुकाना होता है।

डाक घर में पांच साल की जमा
सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचत वाला यह उत्पाद बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह ही है। यदि आप निवेश करने के 5 साल के अंदर इसे भुनाते हैं तो इस पर मिला इनकम टैक्स लाभ वापस ले लिया जाएगा। इस तरह के डिपॉजिट के लिए ब्याज दर वित्त मंत्रालय द्वारा हर तिमाही तय की जाती है।

राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र (एनएससी)
टैक्स बचत के लिए यह काफी समय से लोगों का पसंदीदा निवेश विकल्प है। इसकी परिपक्वता अवधि 6 साल की है। सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचत वाले इस निवेश विकल्प में समय से पहले कोई भुगतान संभव नहीं है।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस)
केवल सीनियर सिटीजन ही इस योजना में निवेश कर सकते हैं। इसकी मैच्योरिटी की अवधि पांच साल है। सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचत के इस विकल्प में भी रकम की आंशिक निकासी की अनुमति नहीं है।

सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाय)
केंद्र सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत लांच की गई यह स्कीम गर्ल चाइल्ड के लिहाज से बेहतरीन विकल्प है। अगर आपकी बेटी की उम्र 10 साल से कम है तो आप अपनी बेटी के लिए एसएसवाय खाता खोल सकते हैं।

बीमा कंपनी की पेंशन योजना
अगर आप बीमा कंपनियों के पेंशन प्लान में निवेश करते हैं तो आप इस रकम में से 1.5 लाख रुपए पर टैक्स लाभ ले सकते हैं। यदि आप मैच्योरिटी से पहले पेंशन योजना को सरेंडर कर देते हैं, तो उससे मिलने वाली रकम को उस साल की आमदनी माना जाएगा और आपको उस पर टैक्स चुकाना होगा। यह ध्यान रखें कि सेक्शन 80C और 80CCC के तहत कुल मिलाकर टैक्स बेनिफिट के लिए कुल रकम 1.5 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती।

राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस)/अटल पेंशन योजना (एपीवाय)
निवेश का यह विकल्प थोड़ा जटिल है। आप सेक्शन 80CCD(1) के तहत NPS में सालाना 1.5 लाख रुपए तक का निवेश करते हैं तो यह सेक्शन 80C के तहत मिलने वाले लाभ में शामिल है। अगर आप एनपीएस में सेक्शन 80CCD(1B) के तहत सालाना 50,000 रुपए तक का निवेश करते हैं तो यह इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C से अलग है। अटल पेंशन योजना में निवेश करने पर भी आपको यही टैक्स लाभ मिलेगा।

टैक्स बचत के लिहाज से महत्वपूर्ण है सेक्शन 80C
इनकम टैक्स बचत के लिहाज से आयकर कानून का सेक्शन 80C बहुत महत्वपूर्ण है। इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C में बहुत से ऐसे विकल्प हैं जिसमें निवेश के जरिए आप 1.5 लाख रुपए तक की रकम पर टैक्स बचा सकते हैं। आप इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के तहत आने वाले निवेश विकल्पों में 1.5 लाख रुपए से अधिक का भी निवेश कर सकते हैं। हालांकि टैक्स बचत के हिसाब से कर लाभ केवल 1.5 लाख रुपए तक ही सीमित होगा। आमतौर पर इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के तहत आने वाले टैक्स बचत के सभी निवेश में लॉक-इन होता है। इसका मतलब यह है कि निवेश करने के बाद कुछ समय तक आप इनसे पैसे नहीं निकाल सकते। 

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