नई दिल्ली: सीमा पर पिटने के बाद चीन बातचीत के लिए बेकरार है बेचैनी इतनी कि मॉस्को में चीन के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) से मिलने की गुहार लगा रहे हैं. 24 घंटे में पांच बयान जारी करने वाला चीन अब बातचीत को लेकर इतना बेताब क्यों है क्या ये उसका डर है या भारत को लेकर उसकी गलतफहमी दूर हो गई है? या फिर बातचीत का ड्रामा चालबाज चीन की एक और चाल है? इसलिए अब सवाल ये है कि धोखेबाज चीन पर कैसे यकीन करें.
आपको बता दें कि मॉस्को में आज भारत-चीन के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वेई फेंग्हे की आज शाम मुलाकात हो सकती है. चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंग्हे ने मुलाकात की पहल की है. भारत और चीन के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के बीच चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंगही और भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ये संभावित मुलाकात काफी अहम हो सकती है.
इधर, आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (Manoj Mukund Narwane) इस समय लद्दाख के दौरे पर हैं. चीन के साथ LAC पर चल रहे गतिरोध के बीच सेना प्रमुख का ये दौरा बहुत अहम और ऐतिहासिक हैं. जनरल नरवणे ने लद्दाख में सैन्य तैयारियों का जायजा लेने के बाद बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सीमा पर हालात बहुत तनावपूर्ण हैं और हमे लगातार सतर्क रहना पड़ेगा.
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थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने लद्दाख में सैन्य तैयारियों की समीक्षा करने के बाद कहा कि LAC पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. यहां स्थिति बहुत नाजुक है. हमारी सुरक्षा के लिए जो कदम उठाने थे वो हमने उठाए हैं. भारतीय सैनिकों में उत्साह है. उन्होंने कहा कि हर हालात के लिए भारतीय सेना तैयार है.
सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने आगे कहा कि हम LAC पर यथास्थिति बरकरार रखेंगे. सैन्य और कूटनीतिक दोनों तरीकों से चीन से बातचीत की जा रही है. इस समस्या को बातचीत के जरिए हल किया जा सकता है.
आपको बता दें कि सेनाध्यक्ष एम.एम नरवणे का दौरा लद्दाख में ऐसे वक्त में हुआ है, जब भारतीय सेना पिछले एक सप्ताह में चीन को कई बार मात दे चुकी है. पैंगोंग में चीन की अतिक्रमण की कोशिश नाकाम हुई. ब्लैक टॉप पर भारतीय सेना ने कब्जा कर लिया. लद्दाख की पैंगोंग झील के किनारे पहली बार चीन युद्ध लड़ने से पहले ही कई मोर्चों पर हारने लगा है. लद्दाख में पैंगोंग झील का दक्षिणी हिस्सा अब पूरी तरह से भारत के नियंत्रण में हैं.
