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पटना20 मिनट पहले
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वर्चुअल रैली ‘निश्चय संवाद’ में बोलते नीतीश कुमार।
- सबके घर में बिजली पहुंच न गया, अब ललटेन-ढिबरी का तो जरूरते नहीं रह गया है
- लालू राज में शाम के पहले ही लोग घर में घुस जाते थे, अपराधी राइफल बाहर निकाल गाड़ी पर घूमते थे
- नई पीढ़ी वालों को बताइए, आज 18 हो गए, 19 हो गए- बताइए, नहीं जानेगा तो गड़बड़ लोगों के चक्कर में पड़ जाएगा, हमारे विकास को दिखाइए
जदयू की पहली वर्चुअल रैली ‘निश्चय संवाद’ में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने 15 साल की उपलब्धियां गिनाई और लालू-राबड़ी के शासनकाल पर जमकर हमला बोला। पूरे भाषण के दौरान राबड़ी और तेजस्वी का नाम लिए बिना दोनों पर जमकर बरसे। सिर्फ एक बार लालू यादव का नाम लिया। नीतीश ने कहा कि लालूजी कहते हैं कि हमलोग बिहार पर भार हैं। आप जेल में हैं तो लोगों को पता चल ही रहा है कि कौन भार है। जब आपको काम करने का मौका मिला तब आपलोगों ने क्यों नहीं किया? आप जब से अंदर हैं बिहार की जनता को मुक्ति मिली हुई है। तेजस्वी के लिए कहा कि कुछ लोग बेवजह बोलते रहते हैं और ट्वीट कर लोगों को लड़ाने की कोशिश करते हैं। कुछ लोगों की दिलचस्पी ही लड़ाने में है। ऐसे कुछ लोगों को अपने साथ हायर कर लिया है और वे इसी पर प्लानिंग करते हैं।
15 साल में क्या हालत कर दी थी…शाम में ही घरों में बंद हो जाते थे लोग
15 साल पति-पत्नी (लालू यादव और राबड़ी देवी) का राज था। कानून-व्यवस्था की क्या स्थिति थी? सामूहिक नरसंहार होता था। हमने कानून का राज कायम किया। साफ कर दिया कि क्राइम-करप्शन और कम्युनलिज्म को बर्दाश्त नहीं करेंगे। 15 साल पहले कोई गवाही देने के लिए निकल पाता था क्या? हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलकर जो चर्चा हुई, कितना तेजी से ट्रायल चला दोषियों पर। लोगों का मनोबल ऊंचा हुआ। शाम होने के पहले लोग घरों में चले जाते थे। कुछ चंद लोग कार के बाहर राइफल और बंदूक दिखाते हुए चलते थे। पुरानी तस्वीर और आज की तस्वीर देखिए और लोगों को दिखाइये। 15 साल का अंतर पता चल जाएगा।
बच्चों को पढ़ाने में राजद की नहीं थी दिलचस्पी
राजद के 15 साल में बिहार में शिक्षा की क्या स्थिति थी। उन्हें बच्चों को पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं थी। आज शिक्षा के मामले में जो बोलते रहते हैं, वे अपने दिन याद करें। मोकामा के टाल में एक बच्चे ने मुझसे कहा था सर हम पढ़ेंगे नहीं? पहले क्या हालत थी। स्कूल नहीं थे। जहां स्कूल थे, वहां शिक्षक नहीं। हमें काम करने का मौका मिला तो शिक्षा समिति के माध्यम से हर गांव में स्कूल बनवा दिया। साढ़े तीन लाख शिक्षक भर्ती किए गए।
सबसे ज्यादा महादलित बच्चे स्कूलों से दूर थे। उन्हें भी पढ़ाकर आगे स्कूलों में भेजने का काम किया। गरीब माता-पिता पोषाक नहीं दे पाने के चलते पांचवी क्लास के बाद बेटियों को स्कूल नहीं भेजते थे। बेटियां पढ़ें इसके लिए हमने पोशाक योजना शुरू की। लड़कियों के लिए साइकिल योजना शुरू की। गांव-गांव में लड़कियां साइकिल चलाकर स्कूल जाने लगीं। कितने परिवारों में आत्मबल पैदा हुआ। लड़कियों की संख्या हाईस्कूलों में भी बढ़ने लगी। कई जगह लड़के कहने लगे अंकल हमलोगों पर भी ध्यान दीजिए। फिर लड़कों के लिए भी साइकिल योजना शुरू कर दी।
दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व बिहार में है। हमने प्रजनन दर घटाने पर फोकस किया। सर्वे में पाया गया कि वैसा परिवार जिसमें पत्नी मैट्रिक पास है तो प्रजनन दर 2 प्रतिशत और इंटर पास तो 1.6 फीसदी। उसी दिन सोच लिया कि सभी लड़की को इंटर तक पढ़ाएंगे। अब सभी पंचायतों में 9वीं तक की पढ़ाई शुरू हो रही है। शिक्षक से अनुरोध करते हैं कि बच्चों को अच्छे से पढ़ाईये।
सुशांत की मौत से सदमे में थे करोड़ों लोग, सीबीआई जांच से इंसाफ की उम्मीद
नीतीश ने सुशांत की मौत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुशांत की मौत से देश में करोड़ों लोगों को सदमा लगा था। जिस तरीके से जांच होनी चाहिए वह नहीं हो रहा था। पिता ने पटना में केस दर्ज कराया और उनकी सहमति के बाद हमने सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर सहमति दी। हमें उम्मीद है कि सीबीआई की जांच में सच सामने आएगा और परिवार को न्याय मिलेगा।

जदयू ऑफिस के कर्पूरी सभागार में हुए ‘निश्चय संवाद’ में शामिल लोग।
बिजली-गांवों में भी 22 घंटे से ज्यादा बिजली, लालटेन का युग खत्म
राजद के शासनकाल में 700 मेगावाट बिजली की खपत थी और अब 5000 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। 2012 में 15 अगस्त को ऐलान किया था कि बिजली की स्थिति नहीं सुधरी तो वोट नहीं मांगेंगे। 2018 में 31 दिसंबर तक लक्ष्य रखा कि हर घर बिजली पहुंचा देंगे और समय से दो महीने पहले ही यह काम पूरा हो गया। शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 22 घंटे से ज्यादा बिजली दी जा रही है। जो भी नए घर बन रहे हैं उन्हें कनेक्शन दिया जा रहा है। पूरे बिहार में लालटेन की जरूरत खत्म हो गई है। पति-पत्नी के राज में तो लालटेन और ढिबरी ही थी।
‘सड़क’-पता ही नहीं चलता था कि गड्ढे में सड़क है कि सड़क में गड्ढा
नीतीश ने कहा कि पहले पता ही नहीं चलता था कि गड्ढे में सड़क है कि सड़क में गड्ढा है। जब हम सांसद थे कि तो औसतन अपने क्षेत्र में हर दिन 10 किलोमीटर पैदल चलते थे। आज केंद्र और राज्य की योजनाओं से पूरे बिहार में सड़कें चकाचक हो गई है। लोग 5 घंटे में बिहार के किसी कोने से पटना पहुंच सकते हैं। गांवों में भी पक्की गली का निर्माण कराया गया है। हमारा अगला लक्ष्य है कि गांवों में बने सड़कों को नेशनल या स्टेट हाइवे से जोड़ा जाए और सड़क बने हैं उनका और चौड़ीकरण हो जाए।
‘पानी’-अक्टूबर तक हर घर पहुंच जाएगा नल का जल
कोरोना के चलते इस योजना में थोड़ी देर हुई लेकिन फिर भी अक्टूबर के अंत तक सभी वॉर्डों में नल का जल पहुंच जाएगा। पंचायतों में 56089 वॉर्डों में से 32422 वार्डों में काम पूरा हो चुका है। कोरोना प्रभावित 52 वॉर्ड में अभी काम रूका है और 80 वार्डों में बोरवेल फेल हुआ है। पति-पत्नी के शासन में लोग सोच भी नहीं सकते थे कि घर पर पीने के शुद्ध पानी का इंतजाम हो सकता है।

पटना सिटी के राजदरबार हॉल में नीतीश का भाषण सुनते लोग।
‘कोरोना’-बिहार में हर दिन डेढ़ लाख जांच, रिकवरी दर सबसे ज्यादा
नीतीश ने कहा कि बिहार में हर दिन कोरोना का जांच डेढ़ लाख पार कर चुका है। रिकवरी दर पूरे देश में सबसे अधिक है। यहां 10 लाख की जनसंख्या पर 32233 जांच हो रही है। आरटीपीसीआर मशीन से 11350 जांच हो रही है। इसे 20 हजार करने का लक्ष्य है। अगले कुछ दिनों में केंद्र से कोबास मशीन मिल जाएगी और राज्य सरकार 10 आरटीपीसीआर मशीन खरीद रही है। राज्य में अब जो भी लोग जांच कराना चाहते हैं करा सकते हैं। हर जगह सुविधा उपलब्ध है। लोगों को इससे डरने की नहीं सचेत रहने की जरूरत है।
राजद से पूछा-वोट लेते हैं, कब्रिस्तान की घेराबंदी कर पाए थे क्या
नीतीश ने कहा कि हमने राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बना रहे इसके लिए काम किया। ये लोग इतना दिन राज करते रहे। वोट तो लेते रहते थे, लेकिन कब्रिस्तान की घेराबंदी की थी क्या? हमने सभी कब्रिस्तान का सर्वे कराया और घेराबंदी कराई। मंदिर में लगातार चोरी होती थी, 226 मंदिरों की घेराबंदी कराई, 112 पर काम जारी है। भागलपुर में जो दंगा हुआ था उसमें राजद ने दोषियों पर क्या कार्रवाई की? हम आए तो कार्रवाई हुई। लोगों को मुआवजा दिया। जितने लोगों को मकान-दुकान का नुकसान हुआ ता उन्हें मदद दी।
अपने काम की प्रचार नहीं करता
नीतीश ने कहा कि मैं कभी अपने काम की प्रचार नहीं करता। बहुत लोगों को काम कम प्रचार ज्यादा करना होता है। एक-एक काम करवाया गया। जितने राशन कार्डधारी हैं उनको भी एक हजार रुपए प्रति परिवार की मदद की। केंद्र सरकार ने हर व्यक्ति को राशन कार्ड के अलावा चावल या गेहूं, चना और दाल दिया गया। ये सुविधा केंद्र ने नवंबर तक भेजने का फैसला किया।
1640 करोड़ रुपए वितरित किया। जिन्हें राशन कार्ड नहीं था उनकी भी मदद की। 23 लाख 38 हजार राशन कार्ड लोगों को दिया गया। कोई भी वंचित रहेगा उसकी हर तरह से मदद की जाएगी। अब पॉश मशीन से राशन दी जाती है। कई बुजुर्गों को उंगलियों में निशान नहीं है। उन लोगों के लिए यह निर्देश है कि सबसे पहले प्रति माह पॉश से अलग वितरित करिए। उसके बाद बाकी लोगों को दीजिए। स्कूलों के बंद होने के कारण बिना परीक्षा प्रोन्नत करने का निर्णय लिया गया। मिड डे मील की हर जगह राज्य सरकार की तरफ से राशि देंगे, केंद्र की योजना तो अलग ही है सभी छात्रों को पैसा दे रहे हैं, यह राज्य सरकार के खजाने से दिया जा रहा है।

पटना: अनीसाबाद गोलंबर पर रणवीर नंदन के आवास के बाहर नीतीश का भाषण सुनते लोग।
चुनाव में एक-एक चीज के लिए सजग रहने की जरूरत है
दूरदर्शन से ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। सभी से अपील है कि इस साल चुनाव होने वाला है। एक-एक चीज के लिए ज्यादा सजग रहने की जरूरत है। कुछ लोगों को देखा कि मास्क नहीं पहन रहे हैं। लोगों को भी प्रेरित करिए घर से निकलते हैं तो मास्क लगाइए। हाथ साफ कीजिए, एक दूसरे से दो गज की दूरी रखिए। गर्भवती महिलाएं और 10 साल से कम उम्र के बच्चे और गंभीर बीमारी से पीड़ित को घर से बाहर नहीं निकलने दीजिए। कोरोना की क्या स्थिति होगी यह अभी कहा नहीं जा सकता। दिल्ली में संक्रमण दर नीचे जा रहा था फिर ऊपर जा रहा है। आज बिहार में नीचे जा रहा है। सभी नियम का पालन करिए। लोगों को भी प्रेरित करिए। डरें नहीं, सजग रहिए।
केंद्र ने योजना बनाई कि लोगों को तीन माह तक गैस सिलेंडर मुफ्त दिया जाएगा। बिहार में 80 लाख परिवारों को इसका लाभ मिला है। लॉकडाउन के दौरान बाहर से आए लोगों को रोजगार दिया। 5 लाख 60 हजार 246 योजनाओं में 14 करोड़ मानव दिवसों का सृजन किया। औसतन प्रतिदिन लगभग 10 लाख लोगों को काम मिल रहा है। दूसरे राज्यों से लौटे लोगों को सात निश्चय योजना के तहत ट्रेनिंग दे रहे हैं। परामर्श के लिए 1 लाख 64 हजार 153 लोगों का निबंधन किया गया है।

पटना के चिरैयाटांड़ पुल के नीचे नीतीश कुमार को सुनते लोग।
रोजगार को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक नीति में किया संशोधन
नीतीश ने कहा कि हमने रोजगार के मौके बढ़ाने के लिए औद्योगिक नीति में नया संशोधन किया। 77 क्लस्टर समूहों को चयनित किया गया है। कैपिटल सब्सिडी देने का प्रावधान किया है। 230108 परिवारों को जीविका समूहों से जोड़ा गया है।
इसके अलावा बाढ़ की क्या स्थिति है बिहार में। पिछले साल पहले बाढ़ फिर सूखा फिर बाढ़ की स्थिति बनी। कितना नुकसान हो गया बिहार में। सबके लिए हमने इंतजाम किया है। 16 जिले के 83 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। पीड़ितों तक राहत पैकेट पहुंचाया गया। बाढ़ से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। सामुदायिक रसोई केंद्र चलाया। एक दिन में 10 लाख से ज्यादा लोगों ने भोजन किया। इसमें जो लोग आए सबका कोरोना का जांच कराया गया। कई लोग पॉजिटिव निकले, सबका इलाज कराया गया।
बता दीजिए कि आपदा राहत में पहले किया होता था। किसी को कुछ मिलता था क्या? हमलोग इस पर 2006 से काम कर रहे हैं। 2007 में ढाई करोड़ की आबादी प्रभावित हुई थी और जब लोगों को राहत बांटना शुरू किए। एक-एक क्विंटल अनाज बांटा, लोग मुझे दरभंगा में क्विंटलिया बाबा बोल रहे थे। राहत पहले मिलती तो मुझे क्यों क्विंटलिया बाबा बोलते?
हमनें बाढ़ पीड़ितों को अनाज और कपड़ा दिया। तीन हजार रुपए अनाज के लिए और 3 हजार कपड़े के लिए प्रति परिवार दिया। फसल क्षति का भी सहायता दे दिया। फसल बीमा योजना की जगह सहायता योजना शुरू किया। इस साल हुए नुकसान का भी आकलन हो रहा है उसका लाभ भी जल्द पहुंचा देंगे। फरवरी मार्च और अप्रैल में हुए नुकसान में किसानों को 568 करोड़ का लाभ दिया गया।

राजधानी के कर्पूरी सभागार से जदयू की वर्चुअल रैली ‘निश्चय संवाद’ में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ बाएं से- विजेंद्र यादव, ललन सिंह,अशोक चौधरी और विजय कुमार चौधरी।
नीतीश ने बिहार को बदला, कानून का राज कायम किया: ललन सिंह
रैली की शुरुआत में ललन सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार ने 2005 में सत्ता संभाली और बिहार में विकास की शुरुआत हो गई। उन्होंने बिहार के युवाओं को 15 साल पहले के बिहार की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि नीतीश के राज में बिहार बदल गया है। नौजवानों को बताइए बिहार उनके बचपन में कैसे लालटेन युग में जी रहा था।
लालू राज और नीतीश के शासनकाल की तुलना करें तब आपको पता चलेगा कि बिहार के विकास के लिए नीतीश ने क्या करिश्मा किया है। नीतीश ने असंभव काम को संभव कर दिखाया है। जब नीतीश ने सत्ता संभाली थी तब लोग कल्पना नहीं कर सकते थे। सोच भी नहीं सकते थे कि बिहार बदल सकता है। लोग कहते थे कि बिहार में कुछ नहीं हो सकता। न सड़क, न बिजली, न कानून, जर्जर सड़क और सड़क की जगह गड्ढा। दिन में बिजली दो से ढाई घंटा रहता था। लोग इसे अपना भाग्य मानने लगे थे। यहां अपहरण का उद्योग चलता था। पैसे का लेनदेन पटना से होता था। कोई शाम 7 बजे के बाद बाहर नहीं निकल सकता था। नीतीश ने पूरा बिहार बदल दिया और कानून का राज कायम किया।

जदयू नेता और पूर्व विधायक महेश्वर सिंह ने केसरिया विधानसभा में 250 संवाद केंद्र की व्यवस्था की जहां एलईडी टीवी पर लोगों ने नीतीश का भाषण देखा।
संवाद की शुरुआत मंत्री संजय झा ने की। इस मौके पर उन्होंने जदयू के सिद्धांतों, नीतियों और सरकार की प्राथमिकताओं की जानकारी दी। रैली के दौरान वीरचंद पटेल पथ स्थित जदयू कार्यालय में कर्पूरी सभागार के मंच पर नीतीश कुमार के साथ विजेंद्र यादव, संजय झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी मौजूद थे।
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