नई दिल्ली25 मिनट पहले
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वायरस के बढ़ते प्रकोप से फ्यूल की मांग में गिरावट देखी जा सकती है। इसके अलावा आर्थिक सुधारों को भी धक्का लग सकता है।
- कच्चे तेल की कीमतें जून के बाद पहली बार 40 डॉलर प्रति बैरल के नीचे गिरा।
- कोरोना वायरस का संक्रमण भारत, ग्रेट ब्रिटेन, स्पेन और अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों में तेजी फैल रहा है।
क्रूड ऑयल की कीमतों में मंगलवार को भारी गिरावट देखी गई। गिरावट के पीछे दुनियाभर में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप और सऊदी अरब द्वारा कीमतों में कटौती की घोषणा को वजह माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतें जून के बाद पहली बार 40 डॉलर प्रति बैरल के नीचे गिरा। इस दौरान यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) में भी 8 फीसदी की गिरावट रही।
डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें 8% नीचे
मंगलवार को सुबह 11:33 बजे (1533 जीएमटी) डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें 8% नीचे गिरकर 36.35 डॉलर/ बैरल पर आ गया था, जो 15 जून के बाद का निम्नतम स्तर है। इसके अलावा ब्रेंट क्रूड भी करीब 6% फिसल कर 39.55 डॉलर/ बैरल पर आ गया था। इससे डब्ल्यूटीआई क्रूड और ब्रेंट क्रूड की कीमतें अगस्त के निचले स्तरों से भी नीचे आ गई हैं।
दरअसल कोरोना वायरस का संक्रमण भारत, ग्रेट ब्रिटेन, स्पेन और अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों में तेजी फैल रहा है। वायरस के बढ़ते प्रकोप से फ्यूल की मांग में भारी गिरावट देखी जा सकती है। इसके अलावा आर्थिक सुधारों को भी धक्का लग सकता है।
प्राइस कट का असर
इससे पहले सऊदी अरब की सरकारी ऑयल कंपनी अरामको ने अक्टूबर में आधिकारिक कीमतों में कटौती की घोषणा की थी। इसके बाद से क्रूड की कीमतों में गिरावट देखने को मिला है। कीमतों में कटौती के पीछे मांग में कमी का अनुमान है। पीके वेलेग एलएलसी के एनर्जी एनलिसिस्ट फिल वर्लेगर का कहना है कि, सऊदी अरब द्वारा कीमतों में कटौती की घोषणा के बाद एशियाई खरीदारों के लिए डब्ल्यूटीआई क्रूड में रुचि घटेगी, जिसका असर कीमतों पर भी दिखेगा।
हालांकि क्रूड की कीमतों में अप्रैल के निचले स्तरों से शानदार रिकवरी दिखी है। पेट्रोलियम एक्सपोर्टर देशों और सहयोगियों के संगठन ‘ओपेक+’ से की गई रिकॉर्ड आपूर्ति के चलते रिकवरी देखी गई। इसके अलावा क्रूड को कमजोर अमेरिकी डॉलर से भी समर्थन मिला है।
क्रूड ऑयल की कीमतों को तय करने के लिए ऑयल उत्पादक देश 17 सितंबर को बैठक करने जा रहे हैं।
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