नई दिल्ली। कोरोना वायरस के मामले बढ़ने की वजह से दोबारा क्रूड की मांग को लेकर डर बन गया है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की मांग में अचानक से बड़ी कमी आई है। ऐसे में ओपेक देशों की कुछ कंपनियों ने क्रूड पर छूट देनी भी प्रारम्भ कर दी है। अन्य तरफ ओपेक और अमेरिका में उत्पादन अधिक है, किन्तु बहुत से डिमांड अभी होल्ड पर है। इस कारण क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट आने की आशंका बनी हुई है।
एक्सपर्ट्स की माने तो, कोरोना के मामले जहां बढ़ रहे हैं, वहीं कुछ देशों में वापस इसके मामले आने लगे हैं। कोरोना के चलते अर्थव्यवस्था पर दबाव रहेगा। ऐसे में आगे भी क्रूड उत्पादक कंपनियों को मांग कमजोर रहने की आशंका बन गई है। इस कारण अनेक कंपनियों ने छूट देनी प्रारम्भ कर दी है कि उनका प्रोडक्शन खप जाए। ऐसे में आगे क्रूड में फिर बड़ी गिरावट से मना नहीं किया जा सकता है।
जानकारी के मुताबिक, बीते मंगलवार के व्यवसाय में ब्रेंट क्रूड में 5 प्रतिशत से ज्यादा तथा डबल्यूटीआई क्रूड में 7 फीसदी से ज्यादा की कमी आई। ब्रेंट क्रूड 40 डॉलर प्रति डॉलर के नीचे चला गया, जबकि डबल्यूटीआई क्रूड 36 डॉलर प्रति डॉलर के इर्द-गिर्द आ गया। यह क्रूड में 15 जून के पश्चात से सबसे निचला स्तर है।
बता दें कि ब्रेंट क्रूड की तरफ से कंपनियों को राहत मिलती है तो वे कंज्यूमर्स को राहत प्रदान कर सकती हैं। यदि क्रूड में 20 प्रतिशत की कमी आती है तो पेट्रोल और डीजल में 5 प्रतिशत कमी की जा सकती है। ऐसे में यह बोल सकते हैं कि पेट्रोल और डीजल 2.5 से 3 रुपये प्रति लीटर सस्ता हो सकता है।
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