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- Moong, Jowar And Guar Worth 2.74 Billion Rupees In 40 Thousand Hectares; Big Reason 336.4 Mm More Rain Than The Average, So The Fields Of 30 Villages Of Merta Were Devastated.
नागौरएक घंटा पहले
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असाधारण त्रासदी फसल तबाही की भयावह तस्वीर- जल समाधि में लीन हो चुकी मूंग की फसल तबाही की ये तस्वीर मेड़ता के खेडूली गांव के किसान बुधाराम के खेत की है। क्षेत्र के किसान इसी असाधारण त्रासदी से त्राहिमाम कर रहे हैं, क्योंकि फसलें जल समाधि ले चुकी हैं।
- मेड़ता के 30 गांवों के खेतों में तबाही का मंजर
- मेड़ता-खींवसर व नागाैर तहसील के 40 गांवों के 20 हजार से अधिक किसानाें की उम्मीदों पर पानी फिरा
(ओमप्रकाश खिलेरी) कोरोनाकाल में लाखों का कर्ज लेकर खेती करने वाले मेड़ता-खींवसर व नागाैर तहसील के 40 गांवों के 20 हजार से अधिक किसानाें की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। इन गांवाें में लगातार बरसी आफत (औसत से डेढ़ गुणा से ज्यादा बारिश) से पकने को तैयार 40 हजार हैक्टेयर में खड़ी खरीफ की फसल तबाह हाे गई है।
सहायक निदेशक कृषि विस्तार अणदाराम चौधरी के अनुसार इन 40 हजार हैक्टे. में पौने 3 अरब खरीफ की फसलें नष्ट हाे गई हैं। क्योंकि इस इलाके में प्रति हैक्टे. औसत 12 क्विंटल मूंग होता है। मूंग का समर्थन मूल्य 7196 रुपए है। खेतों में पकी फसलों को जल-समाधि लेते देख किसानों की हालत खराब हाे चुकी है। भास्कर टीम ने मेड़ता तहसील के दो दर्जन गांवों का दौरा कर हालात जाने तो मूंग, ग्वार, ज्वार सहित कपास जैसी फसलें पानी में दम तोड़ती नजर आई। मेड़ता तहसील के 30 से ज्यादा गांवों में अतिवृष्टि से फसल तबाही का एक सा मंजर है। खींवसर व नागाैर के 10 गांवों में जलभराव के कारण मूंग सहित कई फसलों में 70 से 80 फीसदी नुकसान हो चुका है।
इन गांवों में सर्वाधिक तबाही
मेड़ता: लीलिया, जसवंताबाद, गैमलियावास, आकेली ए, खाकड़की, बड़गांव, खेड़ूली, मूंगदड़ा, फालकी सहित 30 गांवों में 70-80% नुकसान।
खींवसर/नागाैर: बसवाणी, बरणगांव, कादरपुरा, सिणाेद, भाकराेद, शीलगांव, डेहरू, लालाप सहित 10 गांवाें में 50-70% नुकसान।
पानी भराव का बड़ा कारण
क्षेत्र में कलेश्वाइन मिट्टी है, जो ज्यादा पानी नहीं सोखती। डेढ़ फीट नीचे ही मुड़ की परत है।
इन गांवों में लाल चिकनी और काली मिट्टी होना बड़ा कारण है।
बारिश की स्थिति
क्षेत्र में औसत बारिश 418.6 एमएम होती है। मगर इस बार औसत से 336.4 एमएम ज्यादा, यानी-755 एमएम जिले की सर्वाधिक बारिश हो चुकी है।
खींवसर में औसत 309.9 एमएम बारिश हाेती है, मगर इस बार 101 एमएम ज्यादा, यानी 411.1 एमएम बारिश हाे चुकी है।
नुकसान का गणित
- मेड़ता में 20 हजार हैक्टे. मूंग हैं। यहां प्रति हैक्टे. औसत 12 क्विं. मूंग होता है। यानी 2.40 लाख क्विं. मूंग हाेते जो समर्थन मूल्य 7196 रुपए प्रति क्विं. के हिसाब से 1 अरब 72 करोड़ के होते। 15 हजार हैक्टे. ज्वार, कपास व ग्वार में 70 करोड़ का नुकसान हो गया।
- 12 गांवाें में 5000 हैक्टे. में पानी भरने से 50-70% खराबा हाे चुका। 2500 हैक्टे. में 30 हजार क्विंटल मूंग होते। किसानाें काे 21.58 करोड़ का नुकसान। 2500 हैक्टे.में ज्वार, तिल, ग्वार, बाजरा और कपास में 11 करोड़ का नुकसान हुआ है।
यूं समझें, किसानाें का दर्द
खेड़ूली के किसान बुधाराम ने बैंक से कर्ज ले 30 बीघा में मूंग बाेये। बुवाई, खाद-बीज और निराई-गुड़ाई पर 30 बीघा में डेढ़ लाख खर्च किए। अब आफत की बारिश से खेत में पानी भर गया और पूरी फसल डूबकर सड़ गई।
एक्सपर्ट व्यू
फसल में 4-5 दिन पानी खड़ा रहता है तो पौधा जमीन से ऑक्सीजन नहीं ले पाता। जड़ें गल जाती हैं। नाइट्रोजन जमीन के ज्यादा नीचे चला जाता है जो पौधे को नहीं मिल पाता। मूंग में येलोमोजेक वायरस पनपता है। मैंने भी इस इलाके में दौरा किया है। हालात बेहद गंभीर हैं। किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
-डॉ. हरीराम चौधरी, कृषि वैज्ञानिक।
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