NEET Exam held in jaipur a live story out side of exam center jaipur with a student father | फुटपाथ पर हेलमेट बेचता हूं, बेटी की कोचिंग के लिए रुपए उधार लिए, एग्जाम रद्द हो जाता तो अगले साल फीस कहां से लाता

जयपुर31 मिनट पहलेलेखक: विष्णु शर्मा

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बेटी काजल के परीक्षा देने जाने के बाद जेडीए सर्किल चौराहे पर बस स्टैंड पहुंचे राजकुमार शाह। वहां बिड़ला मंदिर को देखकर हाथ जोड़ लिए और बेटी की सफलता की कामना करने लगे। उनका कहना था कि एग्जाम इसी साल नहीं होता तो वे अगली साल फीस कहां से लाते। यह समस्या खड़ी हो जाती।

  • जयपुर में नीट परीक्षा के दौरान ग्राउंड रिपोर्ट में भास्कर संवाददाता ने की परिजनों से बात
  • प्रताप नगर के राजकुमार शाह ने कहा- एग्जाम स्थगित होने की मांग से डर लगने लगा था

बच्चों की अच्छी परवरिश और फिर उन्हें पढ़ा-लिखाकर सक्सेस बनाना हर माता-पिता का ख्वाब होता है। देशभर में आज बहुप्रतीक्षित नीट की परीक्षा हुई। अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने का सपना लेकर उनके माता-पिता परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे थे। जयपुर में भास्कर संवाददाता ने रामबाग सर्किल के पास स्थित सुबोध पब्लिक स्कूल में परिजन से बातचीत की। यहां परीक्षा केंद्र के बाहर सड़क के दूसरी कोई लग्जरी कार में तो कोई पेड़ के नीचे बैठा यही अरदास कर रहा था कि उनके बच्चों की मेहनत सफल हो और वे डॉक्टर की पढ़ाई करके उनके सपनों को पूरा कर सकें। भास्कर संवाददाता ने ऐसे ही एक पिता से बातचीत कर जानी उनके मन की बात-

बिड़ला मंदिर से कुछ दूर सड़क पर खड़े होकर बेटी की सफलता की कामना करते राजकुमार।

बिड़ला मंदिर से कुछ दूर सड़क पर खड़े होकर बेटी की सफलता की कामना करते राजकुमार।

फुटपाथ पर हेलमेट बेचकर परिवार को पालता हूं, बेटी की पढ़ाई के लिए रुपए उधार लिए

परीक्षा केंद्र से करीब आधा किलोमीटर दूर जेडीए सर्किल चौराहे के पास तेज धूप में सूने पड़े बस स्टैंड पर राजकुमार शाह बैठे मिले। बातचीत में उन्होंने कहा कि वे यूं तो राजस्थान के बाहर के रहने वाले हैं। पिछले कई वर्षों से जयपुर के प्रताप नगर इलाके में रहते हैं। राजकुमार ने बताया कि मैं गरीब आदमी हूं। बरसों से जयपुर में फुटपाथ पर हेलमेट बेचकर परिवार का पेट पालता हूं। परिवार में दो बेटे और उनसे बड़ी एक बेटी काजल है। बचपन से उसका एक ही सपना था। बड़ी होकर डॉक्टर बनना।

बैंक से कर्ज लेकर फीस जुटाई, लेकिन लॉकडाउन की वजह से कोचिंग ही बंद हो गई

लेकिन, मेरी कमाई इतनी नहीं कि बेटी के पढ़ाई के लिए महंगी फीस का इंतजाम कर सकूं। लेकिन बेटी का सपना हमारी आर्थिक कमजोरी की वजह से टूटे। ऐसा भी नहीं चाहता था। बेटी के डॉक्टर बनने के अरमान को पूरा करने के लिए अच्छी कोचिंग की जरूरत थी। इसके लिए मोटी फीस की जरूरत थी। ऐसे में किसी तरह बैंक से लोन लेकर फीस का इंतेजाम किया। उसे गोपालपुरा बाइपास पर अच्छे कोचिंग सेंटर में एडमिशन करवाया। इसी दौरान कोरोना महामारी फैलने से मार्च माह में कोचिंग बंद हो गई। लॉकडाउन लग गया।

छह माह में एक भी हेलमेट नहीं बेच सका, सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बेटी का कमरा अलग रखा

राजकुमार ने बताया कि मेरा धंधा भी बंद हो गया। पिछले छह सात माह से एक भी हेलमेट नहीं बेचा। किसी तरह रूपया उधार कर घर चलाया। लेकिन बेटी काजल की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आने दी। उसके लिए एक अलग कमरे में पढ़ने का इंतजाम किया। कोरोना से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन किया। बेटी देर रात तक पढ़ती थी। पत्नी उसे कमरे तक ही खाना चाय नाश्ता खिलाती।

नीट एग्जाम स्थगित करने की मांग शुरू हुई तो लगा कि अगले साल कैसे फीस जुटाऊंगा

इस बीच नीट एग्जाम स्थगित करने को लेकर राजनीति शुरु हो गई तो डर लगने लगा कि अगर नीट का एग्जाम इस साल नहीं हुआ तो अगली साल दोबारा कोचिंग फीस का इंतेजाम कैसे करुंगा। कहां से रुपया उधार लूंगा। उसे कैसे चुकाऊंगा। हमारे परिवार के लिए बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो जाती। ऐसे में मेरी बेटी और पूरे परिवार की एक ही इच्छा थी कि एग्जाम सही समय पर हो ताकि जल्द ही उसका परिणाम आएं। अब दो तीन दिन के बाद से हेलमेट बेचना शुरू करुंगा। ऐसे में भगवान से प्रार्थना करता था कि किसी तरह का एग्जाम हो जाएं तो कोई परिणाम तो आए। मेरी बच्ची ने बहुत मेहनत की है साहब।

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