Israel, Uae And Bahrain Signed The Abraham Accord In Front Of President Donald Trump – राष्ट्रपति ट्रंप की मौजूदगी में यूएई और बहरीन ने इस्राइल से किया ऐतिहासिक करार

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

Updated Wed, 16 Sep 2020 12:44 AM IST

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर


कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹365 & To get 20% off, use code: 20OFF

ख़बर सुनें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में अरसे से चली आ रही दुश्मनी भुलाकर रिश्तों को सामान्य करने के लिए यूएई और बहरीन ने इस्राइल से ऐतिहासिक करार किए हैं। इस करार के दौरान इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू, यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान, और बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लातीफ बिन राशिद अल ज़ायानी ने अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों से अमेरिका को ईरान के खिलाफ अरब देशों की कड़ी में इन दो मुस्लिम देशों को साथ लाने में कामयाबी मिली है।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित एक समारोह में 
माना जा रहा है कि इन समझौतों से ट्रंप ईरान पर दबाव बना सकेंगे। चुनावी माहौल में वह प्रचार कर सकेंगे कि वह दुनिया के बेहतरीन मध्यस्थ हैं। इस्राइल की बेंजामिन नेतन्याहू सरकार के लिए वह कुछ भी अच्छा करेंगे तो अमेरिका में अमेरिकी ईसाई (इवेंजेलिकल) वोटरों को पसंद आएगा। इन समझौतों को ट्रंप सरकार इसे विदेश नीति की सफलता के तौर पर पेश करेगी।
 

  • जानिए कितना महत्वपूर्ण है ये करार 

खाड़ी देशों को कारोबार के लिए मिलेंगे अवसर
यूएई ने अपने आपको एक ऐसे देश के तौर पर खड़ा किया है जो सैन्य ताकत है, जहां व्यापार किया जा सकता है और जो पर्यटकों के लिए घूमने की पसंदीदा जगह है। इसके अलावा यूएई को अमेरिका से एफ-35 जंगी विमान और ईए-18जी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमान मिल सकेंगे।

यूएई ने लीबिया और यमन में अपनी सेना का इस्तेमाल किया है। बहरीन और यूएई ने पहले कभी इस्राइल से रिश्ता नहीं जोड़ा। हालांकि, अब उन्हें तकनीक के मामले में अग्रणी इस्राइल के साथ व्यापार की उम्मीद है। इस्राइली लोगों को भी छुट्टियां मनाने के लिए खाड़ी के मरुस्थल, समुद्र तट और मॉल मिल जाएंगे। इन सभी देशों के लिए ये एक अच्छा व्यापारिक मौका भी है।

इस्राइल की अरब देशों में बनेगी पैठ

इन समझौतों के बाद इस्राइल अरब देशों को यह भरोसा देने में कामयाब हो सकेगा कि उनके पास इस्राइल को मान्यता देने के सिवा कोई और चारा नहीं है। वैसे भी मध्य-पूर्व इलाके में इस्राइल अलग-थलग नहीं रहना चाहता है। मिस्र और जॉर्डन के साथ भी उसके कभी अच्छे संबंध नहीं रहे। साथ ही ईरान के खिलाफ उसे ताकत जुटाने में आसानी होगी।

ईरान के एयरबेस तक है यूएई की पहुंच

रणनीतिक तौर पर इस्राइल के एयरबेस ईरान से काफी दूर हैं, मगर यूएई तो खाड़ी के उस पार ही है। ऐसे में अगर ईरान के परमाणु स्थलों पर हवाई हमले करने की बात हुई तो इस्राइल, अमेरिका, बहरीन, यूएई के पास अब कई नए विकल्प होंगे।

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में अरसे से चली आ रही दुश्मनी भुलाकर रिश्तों को सामान्य करने के लिए यूएई और बहरीन ने इस्राइल से ऐतिहासिक करार किए हैं। इस करार के दौरान इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू, यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान, और बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लातीफ बिन राशिद अल ज़ायानी ने अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों से अमेरिका को ईरान के खिलाफ अरब देशों की कड़ी में इन दो मुस्लिम देशों को साथ लाने में कामयाबी मिली है।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित एक समारोह में 

माना जा रहा है कि इन समझौतों से ट्रंप ईरान पर दबाव बना सकेंगे। चुनावी माहौल में वह प्रचार कर सकेंगे कि वह दुनिया के बेहतरीन मध्यस्थ हैं। इस्राइल की बेंजामिन नेतन्याहू सरकार के लिए वह कुछ भी अच्छा करेंगे तो अमेरिका में अमेरिकी ईसाई (इवेंजेलिकल) वोटरों को पसंद आएगा। इन समझौतों को ट्रंप सरकार इसे विदेश नीति की सफलता के तौर पर पेश करेगी।

 

  • जानिए कितना महत्वपूर्ण है ये करार 

खाड़ी देशों को कारोबार के लिए मिलेंगे अवसर

यूएई ने अपने आपको एक ऐसे देश के तौर पर खड़ा किया है जो सैन्य ताकत है, जहां व्यापार किया जा सकता है और जो पर्यटकों के लिए घूमने की पसंदीदा जगह है। इसके अलावा यूएई को अमेरिका से एफ-35 जंगी विमान और ईए-18जी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमान मिल सकेंगे।

यूएई ने लीबिया और यमन में अपनी सेना का इस्तेमाल किया है। बहरीन और यूएई ने पहले कभी इस्राइल से रिश्ता नहीं जोड़ा। हालांकि, अब उन्हें तकनीक के मामले में अग्रणी इस्राइल के साथ व्यापार की उम्मीद है। इस्राइली लोगों को भी छुट्टियां मनाने के लिए खाड़ी के मरुस्थल, समुद्र तट और मॉल मिल जाएंगे। इन सभी देशों के लिए ये एक अच्छा व्यापारिक मौका भी है।

इस्राइल की अरब देशों में बनेगी पैठ

इन समझौतों के बाद इस्राइल अरब देशों को यह भरोसा देने में कामयाब हो सकेगा कि उनके पास इस्राइल को मान्यता देने के सिवा कोई और चारा नहीं है। वैसे भी मध्य-पूर्व इलाके में इस्राइल अलग-थलग नहीं रहना चाहता है। मिस्र और जॉर्डन के साथ भी उसके कभी अच्छे संबंध नहीं रहे। साथ ही ईरान के खिलाफ उसे ताकत जुटाने में आसानी होगी।

ईरान के एयरबेस तक है यूएई की पहुंच

रणनीतिक तौर पर इस्राइल के एयरबेस ईरान से काफी दूर हैं, मगर यूएई तो खाड़ी के उस पार ही है। ऐसे में अगर ईरान के परमाणु स्थलों पर हवाई हमले करने की बात हुई तो इस्राइल, अमेरिका, बहरीन, यूएई के पास अब कई नए विकल्प होंगे।

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

Sushant Singh Rajput’s friend Yuvraj S Singh claims that the drug culture is common in Bollywood : Bollywood News

Tue Sep 15 , 2020
Currently, Rhea Chakraborty has been taken under judicial custody under the drug probe of Sushant Singh Rajput’s death case. With the investigation done by the Narcotics Control Bureau, Rhea Chakraborty’s bail was denied and she is placed in Byculla jail for two weeks. Sushant Singh Rajput’s close friend Yuvraj S […]

Breaking News

Recent Posts