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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह सीडीएस जनरल बिपिन रावत, सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के साथ लेह के निमू अग्रिम पोस्ट पर पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री के लेह दौरे को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की डिजाइन माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री के इस दौरे की भनक उनके लेह पहुंचने के बाद ही मीडिया और अन्य को लगी। वायुसेना से रिटायर पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह का मानना है कि ऐसा करके प्रधानमंत्री ने जहां सेना के मनोबल को काफी अधिक बढ़ा दिया है, वहीं इस डिप्लोमेसी के जरिए उन्होंने चीन के साथ-साथ पूरी दुनिया को संदेश दे दिया है।
एनबी सिंह के अनुसार प्रधानमंत्री के दौरे से दो संदेश जाते है, पहला यह कि वह देश के सैन्य बलों के साथ मजबूती से खड़े हैं। दूसरा बड़ा संदेश चीन के लिए है कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के साथ किसी तरह का कोई समझौता नहीं करता।
इसके पीछे एक छिपा हुआ संदेश है। वह यह कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी संप्रभुता तथा अखंडता की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय जनसमर्थन भी हासिल है। उन्होंने गुरुवार को ही सामरिक साझेदार देश रूस के राष्ट्रपति से बात की और शुक्रवार को अचानक लेह पहुंच गए।
इससे पहले चीन के 59 एप्स पर देश ने प्रतिबंध लगाया। प्रधानमंत्री ने खुद अपने विबो अकाउंट को बंद कराया। अब इसके बाद तो किसी को कोई संदेह नहीं रहना चाहिए। एनबी सिंह के अनुसार 15 जून के बाद से रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, प्रधानमंत्री के वक्तव्यों पर गौर कीजिए।
भारत ने कहीं भी कोई कमजोरी नहीं जारी होने दी है। विदेश मंत्री ने हमेशा अपने बयानों में चीन को अंतरराष्ट्रीय समझौतों, मानदंडों का सम्मान करने के लिए कहा है।
आज प्रधानमंत्री ने लेह का दौरा करके बिना कुछ कहे स्पष्ट संदेश दे दिया कि भारत अपनी सीमा की तरफ आंख उठाकर देखने वाले की आंख में आंख डालकर बात करने की माद्दा रखता है।
रक्षा मंत्री का दौरा रद्द कराकर पीएम खुद गए
पहले शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को लेह जाना था। 15 जून को गलवां नदी घाटी में भारत-चीन के सैनिकों की झड़प के बाद सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे और वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल राकेश भदौरिया लेह-लद्दाख का दौरा कर आए थे।
सेनाध्यक्ष का यह दूसरा दौरा था। लेकिन गुरुवार को अचानक इस दौरे के रद्द होने की खबर आई। शुक्रवार को सुबह जब लोगों की आंख खुली और टीवी सेट के सामने बैठे, तो पता चला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीडीएस जनरल रावत, सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे लेह पहुंच चुके हैं।
प्रधानमंत्री हमेशा से देश की सुरक्षा और सैनिकों के मनोबल को लेकर संवेदनशील रहे हैं। माना जा रहा है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री को सुझाव दिया और जिसे उन्होंने बड़ी सहजता से स्वीकार कर लिया।
15 जून को चीन ने की थी एक तरफा सैन्य कार्रवाई
भारतीय सीमा के कुछ क्षेत्रों में घुस आए चीनी सैनिकों ने पहले पांच मई को भारतीय जवानों पर हिंसक हमला किया, 9 मई को नाकुला में हिंसक झड़प की और 15 जून को पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर गलवां नदी घाटी के पास सुनियोजित तरीके से हिंसक झड़प को अंजाम दे दिया।
इसमें भारतीय सेना के 20 जवानों की शहादत हुई। दर्जनों जवान घायल हो गए। हालांकि भारतीय जवानों की बहादुरी और घातक कमांडो फोर्स के मोर्चा संभाल लेने के बाद चीन की सेना को काफी बड़ा नुकसान हुआ।
तब से दोनों देशों में तनाव काफी बढ़ा हुआ है। इस क्रम में चीन के राजनयिकों, रणनीतिकारों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वक्तव्य का भी काफी दुरुपयोग किया।
प्रधानमंत्री ने यह वक्तव्य देश के राजनीतिक दलों के साथ सर्वदलीय बैठक में दिया था, लेकिन इसके संदर्भ को गलत आधार देते हुए चीनी मीडिया, राजनयिक, विदेश मामलों के जानकार नया भ्रम पैदा करने में लग गए थे।
समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री के दौरे ने इस तरह के भी तमाम सवालों का जवाब दे दिया है।
आपका शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व वहां है, अंदाजा लगाइए
मेजर जनरल (पूर्व) लखविंदर सिंह का कहना है कि लेह-लद्दाख के अग्रिम मोर्चे पर प्रधानमंत्री खुद गए हैं। वह देश का शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व हैं। जाहिर है कि प्रधानमंत्री वहां स्थिति का जायजा लेंगे। सैन्य कमांडरों से मिलेंगे।
15 जून को हुई हिंसक झड़प के बारे में जमीनी रिपोर्ट और चीन के मेजर जनरल के साथ चल रही कमांडर स्तर वार्ता की जमीनी रिपोर्ट भी लेंगे। वहां वह सैन्य संसाधन और जरूरतों को भी समझेंगे। मेरे हिसाब से यह सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने वाला श्रेष्ठ कदम है।
भारत पीछे नहीं हटेगा
प्रधानमंत्री के दौरे को राजनयिक हलके में भी बड़ी गंभीरता से लिया जा रहा है। राजनयिक सूत्र का कहना है कि भारत ने अब तो बिल्कुल साफ संदेश दे दिया है कि वह अपनी स्थिति से बिल्कुल समझौता नहीं करेगा। वह पीछे नहीं हटेगा।
सूत्र का कहना है कि चीन की हमेशा कोशिश रहती है कि वह पड़ोसियों की जमीन पर कुछ किमी आगे बढ़ जाए, वहां तनाव बढ़ाए, दबाव बनाए और फिर उसमें से कुछ किमी पीछे हटकर, कुछ हिस्से पर कब्जा कर ले।
यहां भी चीन की तरफ से इसी तरह संकेत आ रहे थे। चीन के भारत में राजदूत ने एक न्यूज एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कहा कि उनका देश लद्दाख क्षेत्र में भारत से आधे पर समझौता करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है।
जबकि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति को बदलने का प्रयास किया है। सूत्र का कहना है कि यह तो वहीं बात हुई कि एक तो चोरी और दूसरे सीना जोरी। प्रधानमंत्री के दौरे से यह संदेश जाएगा कि यहां सीना जोरी नहीं चलने वाली है।
सार
एनएसए की डिजाइन है पीएम का दौरा
देश के सुरक्षा बलों के साथ मजबूती से खड़े हैं प्रधानमंत्री
सैन्य बलों का मनोबल बढ़ाएगा पीएम का दौरा, चीन को मिला संदेश
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह सीडीएस जनरल बिपिन रावत, सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के साथ लेह के निमू अग्रिम पोस्ट पर पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री के लेह दौरे को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की डिजाइन माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री के इस दौरे की भनक उनके लेह पहुंचने के बाद ही मीडिया और अन्य को लगी। वायुसेना से रिटायर पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह का मानना है कि ऐसा करके प्रधानमंत्री ने जहां सेना के मनोबल को काफी अधिक बढ़ा दिया है, वहीं इस डिप्लोमेसी के जरिए उन्होंने चीन के साथ-साथ पूरी दुनिया को संदेश दे दिया है।
एनबी सिंह के अनुसार प्रधानमंत्री के दौरे से दो संदेश जाते है, पहला यह कि वह देश के सैन्य बलों के साथ मजबूती से खड़े हैं। दूसरा बड़ा संदेश चीन के लिए है कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के साथ किसी तरह का कोई समझौता नहीं करता।
इसके पीछे एक छिपा हुआ संदेश है। वह यह कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी संप्रभुता तथा अखंडता की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय जनसमर्थन भी हासिल है। उन्होंने गुरुवार को ही सामरिक साझेदार देश रूस के राष्ट्रपति से बात की और शुक्रवार को अचानक लेह पहुंच गए।
इससे पहले चीन के 59 एप्स पर देश ने प्रतिबंध लगाया। प्रधानमंत्री ने खुद अपने विबो अकाउंट को बंद कराया। अब इसके बाद तो किसी को कोई संदेह नहीं रहना चाहिए। एनबी सिंह के अनुसार 15 जून के बाद से रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, प्रधानमंत्री के वक्तव्यों पर गौर कीजिए।
भारत ने कहीं भी कोई कमजोरी नहीं जारी होने दी है। विदेश मंत्री ने हमेशा अपने बयानों में चीन को अंतरराष्ट्रीय समझौतों, मानदंडों का सम्मान करने के लिए कहा है।
आज प्रधानमंत्री ने लेह का दौरा करके बिना कुछ कहे स्पष्ट संदेश दे दिया कि भारत अपनी सीमा की तरफ आंख उठाकर देखने वाले की आंख में आंख डालकर बात करने की माद्दा रखता है।
रक्षा मंत्री का दौरा रद्द कराकर पीएम खुद गए
पहले शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को लेह जाना था। 15 जून को गलवां नदी घाटी में भारत-चीन के सैनिकों की झड़प के बाद सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे और वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल राकेश भदौरिया लेह-लद्दाख का दौरा कर आए थे।
सेनाध्यक्ष का यह दूसरा दौरा था। लेकिन गुरुवार को अचानक इस दौरे के रद्द होने की खबर आई। शुक्रवार को सुबह जब लोगों की आंख खुली और टीवी सेट के सामने बैठे, तो पता चला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीडीएस जनरल रावत, सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे लेह पहुंच चुके हैं।
प्रधानमंत्री हमेशा से देश की सुरक्षा और सैनिकों के मनोबल को लेकर संवेदनशील रहे हैं। माना जा रहा है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री को सुझाव दिया और जिसे उन्होंने बड़ी सहजता से स्वीकार कर लिया।
15 जून को चीन ने की थी एक तरफा सैन्य कार्रवाई
भारतीय सीमा के कुछ क्षेत्रों में घुस आए चीनी सैनिकों ने पहले पांच मई को भारतीय जवानों पर हिंसक हमला किया, 9 मई को नाकुला में हिंसक झड़प की और 15 जून को पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर गलवां नदी घाटी के पास सुनियोजित तरीके से हिंसक झड़प को अंजाम दे दिया।
इसमें भारतीय सेना के 20 जवानों की शहादत हुई। दर्जनों जवान घायल हो गए। हालांकि भारतीय जवानों की बहादुरी और घातक कमांडो फोर्स के मोर्चा संभाल लेने के बाद चीन की सेना को काफी बड़ा नुकसान हुआ।
तब से दोनों देशों में तनाव काफी बढ़ा हुआ है। इस क्रम में चीन के राजनयिकों, रणनीतिकारों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वक्तव्य का भी काफी दुरुपयोग किया।
प्रधानमंत्री ने यह वक्तव्य देश के राजनीतिक दलों के साथ सर्वदलीय बैठक में दिया था, लेकिन इसके संदर्भ को गलत आधार देते हुए चीनी मीडिया, राजनयिक, विदेश मामलों के जानकार नया भ्रम पैदा करने में लग गए थे।
समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री के दौरे ने इस तरह के भी तमाम सवालों का जवाब दे दिया है।
आपका शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व वहां है, अंदाजा लगाइए
मेजर जनरल (पूर्व) लखविंदर सिंह का कहना है कि लेह-लद्दाख के अग्रिम मोर्चे पर प्रधानमंत्री खुद गए हैं। वह देश का शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व हैं। जाहिर है कि प्रधानमंत्री वहां स्थिति का जायजा लेंगे। सैन्य कमांडरों से मिलेंगे।
15 जून को हुई हिंसक झड़प के बारे में जमीनी रिपोर्ट और चीन के मेजर जनरल के साथ चल रही कमांडर स्तर वार्ता की जमीनी रिपोर्ट भी लेंगे। वहां वह सैन्य संसाधन और जरूरतों को भी समझेंगे। मेरे हिसाब से यह सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने वाला श्रेष्ठ कदम है।
भारत पीछे नहीं हटेगा
प्रधानमंत्री के दौरे को राजनयिक हलके में भी बड़ी गंभीरता से लिया जा रहा है। राजनयिक सूत्र का कहना है कि भारत ने अब तो बिल्कुल साफ संदेश दे दिया है कि वह अपनी स्थिति से बिल्कुल समझौता नहीं करेगा। वह पीछे नहीं हटेगा।
सूत्र का कहना है कि चीन की हमेशा कोशिश रहती है कि वह पड़ोसियों की जमीन पर कुछ किमी आगे बढ़ जाए, वहां तनाव बढ़ाए, दबाव बनाए और फिर उसमें से कुछ किमी पीछे हटकर, कुछ हिस्से पर कब्जा कर ले।
यहां भी चीन की तरफ से इसी तरह संकेत आ रहे थे। चीन के भारत में राजदूत ने एक न्यूज एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कहा कि उनका देश लद्दाख क्षेत्र में भारत से आधे पर समझौता करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है।
जबकि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति को बदलने का प्रयास किया है। सूत्र का कहना है कि यह तो वहीं बात हुई कि एक तो चोरी और दूसरे सीना जोरी। प्रधानमंत्री के दौरे से यह संदेश जाएगा कि यहां सीना जोरी नहीं चलने वाली है।
WEDNESDAY, July 1, 2020 (HealthDay News) Do you wonder if you’ve been exposed to the new coronavirus in the recent past? Good luck finding out for sure: A new review finds there’s little good evidence of the accuracy of blood antibody tests for COVID-19, especially those performed outside a lab. […]