नई दिल्ली। कोरोना का असर विश्व खाद्य बाजार पर भी तेजी से दिखने लगा है। एक रिपोर्ट के अनुसार चावल सात साल के सबसे महंगे स्तर पर पहुंच चुका है। कारण यह है कि कई देश इस समय अपने यहां चावल का स्टाॅक कर रहे हैं। खासकर इस समय चावल के आयातक काफी सक्रिय हैं। रिपोर्ट के अनुसार 5 प्रतिशत तक टूट वाले सफेेद चावल की कीमत 25 मार्च से 1 अ्रपैल 2020 के बीच में 12 प्रतिशत बढ़ गई। यह 2103 की कीमत से भी अधिक है।
एक अन्तरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी के अनुसार थाई चावल की कीमत में यह बढ़ोत्तरी इस कारण हुई है कि भारत और वियतनाम से इस समय कोरोना के कारण चावल बाहर नहीं जा रहा है। दुनिया के कुल उत्पादन का 90 प्रतिशत चावल एशिया पैदा करता है और इतनी ही यहां खपत भी है। लेबर और माल ढुलाई की समस्या के कारण भारत के चावल निर्यातक कोई नया आर्डर नहीं ले रहे हैं, जबकि वियतनाम की सरकार ने चावल के निर्यात पर रोक लगा दी है।
इस समय थाईलैंड के चावल की मांग काफी अधिक है। एशियाई और अफ्रीकन आयातक थाइलैंड से ही चावल मंगा रहे हैं। भारत के बाद थाईलैंड की दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा चावल का निर्यातक है।
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