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नई दिल्लीएक घंटा पहले
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इंडस वाटर ट्रीटी के मुताबिक, हर साल 31 मार्च को दोनों देशों के कमिश्नरों की बैठक होती है।
- कोरोना वायरस की वजह से मार्च में नहीं हुई थी बैठक
- पिछली बार अगस्त 2018 में लाहौर में हुई थी मीटिंग
भारत और पाकिस्तान में अब इंडस वाटर कमीशन की बैठक को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। सूत्रों के मुताबिक, कोरोना वायरस को देखते हुए भारत ने पाकिस्तान के सामने वर्चुअल मीटिंग का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, पाकिस्तान अटारी बॉर्डर पर मीटिंग करने की बात पर अड़ा हुआ है। कोरोना की वजह से ही मार्च में प्रस्तावित बैठक को टालना पड़ा था।
पिछली बार भारत-पाकिस्तान की परमानेंट इंडस कमीशन (पीआईसी) की मीटिंग अगस्त 2018 में लाहौर, पाकिस्तान में हुई थी। जिसमें भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इंडस वाटर के भारतीय कमिश्नर पीके सक्सेना ने किया था।
दो हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को लेकर विवाद
भारत और पाकिस्तान लंबे समय से दो हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को लेकर विवाद में उलझे हुए हैं। पाकिस्तान भारत के किशनगंगा (330 मेगावाट) और रैटल (850 मेगावाट) हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर आपत्ति जताते हुए कह चुका है कि यह ट्रीटी के प्रावधानों का उल्लंघन है। वहीं, भारत का कहना है कि इनका निर्माण बिल्कुल सही है और इनको ट्रीटी की गाइडलाइन के मुताबिक ही डिजाइन किया गया है।
इंडस कमीशन को जानिए
इंडस वाटर ट्रीटी (सिंधु जल संधि) के तहत बने परमानेंट इंडस कमीशन पर 1960 में भारत और पाकिस्तान ने हस्ताक्षर किए थे। इस कमीशन के तहत दोनों देशों में कमिश्नर नियुक्त किए गए थे। वे सरकारों के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं। इस ट्रीटी के चलते दोनों देशों के कमिश्नरों को साल में एक बार मिलना होता है। उनकी बैठक एक साल भारत और एक साल पाकिस्तान में होती है।
31 मार्च को होती है दोनों देशों की बैठक
इंडस वॉटर ट्रीटी के अनुसार हर साल 31 मार्च को दोनों देशों के कमिश्नरों की बैठक होती है। हालांकि, कोरोनावायरस के प्रकोप को देखते हुए इस साल इस बैठक को टाल दिया गया था।
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