देशभर में चीनी गणेश प्रतिमाओं का हुआ बहिष्कार, बची करोड़ों रुपये की विदेशी मु्द्रा

नई दिल्‍ली। भारत और चीन में जारी सीमा विवाद के बीच चीनी सामानों के बहिष्कार का फैसले को लोग अपनाने लगे हैं। तभी तो इस बार गणेश चर्तुर्थी के मौके पर लोगों ने चीनी गणेश प्रतिमा का बहिष्कार करने के साथ वहां की बनी सजावटी सामानों से भी दूरी बनाई।

देश के अधिकांश हिस्‍सों में लोगों ने देशी चीजों को प्राथमिकता दी, जिससे देशी व्‍यापारियों का कारोबार बढ़ा। कारोबारियों का कहना है कि हर साल चीन से आई 500 करोड़ रुपये की सिर्फ गणेश की प्रतिमा ही भारतीय खरीद लेते थे। वहीं, सजावटी सामानों का दाम जोड़ें तो वह अलग है।

कारोबारियों के शीर्ष संकठन कन्‍फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट) के चीनी वस्तुओं के बहिष्कार और भारतीय सामान के इस्‍तेमाल के आह्वान का देशभर में व्यापक समर्थन दिखाई दिया है।


 यही वजह है कि हर साल गणेश चतुर्थी पर चीन के बने गणेश जी की प्रतिमा के बहुतायत इस्तेमाल की जगह लोगों ने स्थानीय शिल्पकारों और कलाकारों द्वारा बनाए गई गणेश जी की प्रतिमाओं को पूजन के लिए इस्तेमाल करने पर ज़्यादा ज़ोर दिया है। दरअसल कैट का दावा है कि उन्होंने गणेश चतुर्थी के लिए विभिन्न राज्यों में अनेक प्रकार की गणेश प्रतिमाओं को स्थानीय कलाकारों द्वारा विशेष रूप से बनवाया है। 

कोरोना वायरस के डर के बावजूद देशभर में गणेश चतुर्थी का त्योहार बहुत उल्लास और उमंग से मनाया गया और लोगों ने श्रद्धापूर्वक अपने घरों में गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना और पूजन अर्चन किया। कैट ने खास तौर पर मिट्टी, खाद एवं गोबर से बनी गणेश जी की प्रतिमाएं इस बार बनवाई हैं, जिसमें तुलसी, सदाबहार तथा खेती के बीजों को डाला गया है, जिससे कि विसर्जन के बाद इन बीजों को पौधों में लगाया जा सके। इन गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन सहजता के साथ लोग अपने घरों में किसी बाल्टी अथवा अन्य किसी बड़े पात्र में कर सकते हैं।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि गत वर्षों में गणेश प्रतिमाओं की बिक्री के आधार पर एक मोटे अनुमान के तौर पर हर साल चीन में बनी करीब 500 करोड़ रुपए की गणेश प्रतिमाएं विभिन्न रूपों में गणेश चतुर्थी के अवसर पर देशभर में इस्तेमाल की जाती थी। उन्‍होंने कहा कि इस वर्ष गणेश जी की एक भी प्रतिमा चीन से आयात नहीं की गई है। गणेश चतुर्थी पर देशभर में करीब 30 करोड़ गणेश प्रतिमाओं की बिक्री होती थी, जिसमें छोटे से लेकर बड़े और उनसे भी बड़ी गणेश प्रतिमाओं की मांग रहती थी। लेकिन इस बार 6 इंच, 9 इंच और 12 इंच के गणेश जी की मांग ज़्यादा रही, क्योंकि इन साइज़ की गणेश प्रतिमाएं घर में आसानी से विसर्जित की जा सकती हैं।

कारोबारियों ने शिल्पियों का सामान देशभर में पहुंचाया

खंडेलवाल ने कहा कि गणेश की इन प्रतिमाओं को कैट से संबंधित देशभर में फैले व्यापारी संगठन कलाकृतियां बनाने वाले स्थानीय लोगों से बनवाई। उनसे प्रतिमा लेकर व्यापारिक संगठनों के मार्फ़त लोगों तक पहुंचाया। इस प्रकार से कैट ने उन लोगों को रोजगार देने का काम भी किया जिनके पास वर्तमान में रोजगार की कमी है या कोरोना की वजह से जिनका रोजगार छिन गया है। ऐसे लोगों की सहायता कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत में कैट के नेतृत्व में देशभर के व्यापारियों ने अपना बड़ा समर्थन दिया।

कैट महामंत्री ने बताया कि यूं तो देशभर में गणेश चतुर्थी का त्योहार बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। लेकिन, इस बार के गणेश चतुर्थी पर लगाए गए विभिन्न प्रतिबंधों के चलते हर साल लगने वाले गणेश पूजन के बड़े-बड़े पंडाल कहीं नहीं लगे। खासकर मुंबई के प्रसिद्ध लाल बाग का राजा एवं नागपुर के राजा सहित बड़े स्तर पर आयोजित होने वाले गणेश पंडाल इस वर्ष कोरोना के कारण नहीं लग सके। ज्ञात हो कि देशभर में प्रतिवर्ष करीब 10 हज़ार से ज़्यादा छोटे बड़े पंडाल लगते थे और बड़ी संख्या में आम लोग इन पंडालों में जा कर गणेश जी की पूजा किए करते थे लेकिन इस वर्ष एक भी पंडाल नहीं लगा। 

उल्‍लेखनीय है कि महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में गणेश चतुर्थी का त्योहार विशेष रूप से मनाया जाता है। कोरोना वायरस के डर के बावजूद देशभर में गणेश चतुर्थी का त्योहार बहुत उल्लास और उमंग से मनाया गया। लोगों ने बेहद श्रद्धापूर्वक अपने घरों में श्री गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना कर पूजन अर्चन किया।

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