Economy News In Hindi : In the last four years, SBI has written off a loan of Rs 1.79 lakh crore, Rs 52,387 crore in FY 2020. | पिछले चार सालों में एसबीआई ने 1.79 लाख करोड़ रुपए के कर्ज को किया राइट ऑफ, वित्त वर्ष 2020 में 52,387 करोड़ रुपए हुआ

  • मोराटोरियम का समय जब अगस्त में खत्म होगा तब लोन के एनपीए का सही पता चलेगा
  • बैंक ने एनसीएलटी में 821 मामले भेजा था इसमें से 662 मामलों को दर्ज किया गया

दैनिक भास्कर

Jun 24, 2020, 07:51 PM IST

मुंबई. देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने पिछले चार सालों में 1.79 लाख करोड़ रुपए के कर्जों को राइट ऑफ किया है। इसमें से 52,387 करोड़ रुपए केवल वित्त वर्ष 2020 में राइट ऑफ हुआ है। यह जानकारी एसबीआई की वार्षिक रिपोर्ट 2019-20 में दी गई है।

जब कर्ज वसूली की मामूली गुंजाइश हो तो वह राइट ऑफ हो जाता है

दरअसल जब बैंक कर्ज की वसूली नहीं कर पाता है और संभावना होती है कि आगे वह कुछ वसूली कर सकता है, तो ऐसे में कर्ज को राइट ऑफ कर दिया जाता है। ऐसे खातों के लिए पूरी तरह से प्रोविजन किया जाता है। प्रोविजन में उन राशि को दिखाया जाता है जिसे फंसे लोन को कवर करने के लिए आरबीआई के नियमों के तहत अलग रखने की आवश्यकता है।

2019 में 58,905 करोड़ रुपए का हुआ था राइट ऑफ

बैंक ने बताया कि उसने वित्त वर्ष 2019 में 58,905 करोड़ रुपए और वित्त वर्ष 2018 में 40,196 करोड़ रुपए के कर्ज को राइट ऑफ किया था। राइट ऑफ तब होता है जब बैंक को लगता है कि अब उस लोन के रिकवरी की मामूली गुंजाइश बची है। बैंकिंग उद्योग के एक अधिकारी ने बताया कि मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में यह आश्चर्य की बात नहीं है।

टेक्निकल राइट ऑफ से वसूली में सुधार

बैंक ने अपनी 2019-20 वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि एसबीआई ने वित्त वर्ष 2020 में एडवांस अंडर कलेक्शन अकाउंट (AUCA) से 9,250 करोड़ रुपए की वसूली की। वित्त वर्ष 2019 में 8,345 करोड़ रुपए की वसूली हुई थी। AUCA पुराने खराब लोन मामलों को पेश करता है जहां सामान्य स्थिति में वसूली की संभावना नहीं है। बैंक ऐसे खातों को AUCA में ले जाता है, जिसे तकनीकी रूप से राइट ऑफ के रूप में जाना जाता है। हालांकि इसमें भी वसूली के प्रयास जारी रहते हैं। AUCA से वसूली में सुधार बैंक के लिए शुभ संकेत माना जाता है।

2018 में एयूसीए से 5,333 करोड़ रुपए की वसूली

वित्त वर्ष 2018 में एसबीआई ने एयूसीए से केवल 5,333 करोड़ रुपए और वित्त वर्ष 2017 में रु.3963 करोड़ रुपए की वसूली की थी। एक अधिकारी ने कहा कि एयूसीए या राइट ऑफ का मतलब यह नहीं है कि पैसा चला गया है। क्योंकि वसूली के प्रयास जारी रहते हैं। बैंक ने वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि एसबीआई कोविड-19 के समय में वित्त वर्ष 2021 में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) में बड़ी उछाल देख सकता है। इसलिए वह बैड लोन स्पाइक से बचने के लिए उपाय कर रहा है।

एनपीए का मुकाबला करने के लिए बैंक अपने उधारकर्ताओं को सहायता प्रदान करने में कई उपाय कर रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि वे मौजूदा चुनौतियों का सामना कर सके।

मार्च के अंत तक बैंक का ग्रॉस एनपीए

मार्च के अंत तक एसबीआई का ग्रॉस एनपीए 6.15 प्रतिशत रहा है। साल भर पहले की अवधि में यह 7.5 प्रतिशत था। शुद्ध एनपीए साल भर पहले की अवधि में 3.01 प्रतिशत से सुधरकर 2.23 प्रतिशत हो गया। कुल एनपीए साल भर पहले की अवधि में 1.72 लाख करोड़ रुपए से घटकर 1.49 लाख करोड़ रुपए रह गया। एनपीए मामलों से निपटने के लिए बैंक ने स्ट्रेस्ड एसेट्स रिजॉल्यूशन ग्रुप (एसएआरजी) नामक एक विशेष वर्टिकल का गठन किया है।

यह सेक्टर-स्पेसिफिक अप्रोच के साथ एनपीए के समाधान पर ध्यान केंद्रित करेगा। वर्टिकल का नेतृत्व बैंक के एमडी करते हैं। उनके अंडर में तीन सीजीएम और एक डीमएडी होते हैं।  

2020 तक देश भर में 19 एसएआरबी शाखाएं

बैंक ने वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि मार्च 2020 तक देश भर में 19 स्ट्रेस्ड असेट्स मैनेजमेंट ब्रांच (SAMBs) और 53 स्ट्रेस्ड असेट्स रिकवरी ब्रांच (SARBs) थीं। यह बैंक के एनपीए और AUCA के 61.26 प्रतिशत और 86.03 प्रतिशत को कवर करते हैं। एसबीआई ने कहा कि एसएआरजी में वसूली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा एनसीएलटी के माध्यम से आया। वर्टिकल समय-समय पर विशेष वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम भी लागू करता है।

एनसीएलटी को 821 मामले भेजे गए थे

बैंक ने कहा कि नकदी या सिक्योरिटीज से प्राप्तियों के आधार पर परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों (ARCs) को परिसंपत्तियों की बिक्री की देखभाल के लिए एक टीम का गठन किया गया है। बैंक बैलेंस शीट से बोझ हटाने के लिए छूट पर एआरसी को एनपीए बेचते हैं। एआरसी उन खातों को बेचने का प्रयास करता है। एसबीआई के मुताबिक 31 मार्च 2020 तक एनसीएलटी को कुल 821 मामले भेजे गए थे। इसमें से 662 मामले दर्ज किए गए।

82 मामलों से वसूले गए पैसे

एसबीआई ने एनसीएलटी प्रक्रिया के जरिए एक बड़े कर्जदार के खाते से 12,024 करोड़ रुपए की रकम वसूल की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 82 मामलों का समाधान किया गया है। इसमें कुछ खाते बड़े राशि वाले थे। इसके अलावा, एसबीआई ने SMA2 (जिन खातों में भुगतान पिछले 60 दिनों से ओवर ड्यू हैं) में 500 करोड़ रुपए और उससे अधिक के खातों के लिए SARG में क्रेडिट मॉनिटरिंग विशेषज्ञों की एक विशेष टीम का गठन किया है।

इस साल लोन के एनपीए में हो सकती है भारी वृद्धि

एसबीआई ने वार्षिक रिपोर्ट में कहा, SARG द्वारा तनावग्रस्त परिसंपत्तियों का समाधान आपके बैंक के लिए आय पैदा करने के रास्ते पेश करता है। इसके अलावा, एसएआरजी बड़ी संख्या में संपत्तियों की मेगा ई-नीलामी की व्यवस्था करता है। उधारकर्ताओं और गारंटरों की संपत्तियों की पहचान भी करता है। विश्लेषकों के मुताबिक लोन का एनपीए आगे बढ़ सकता है। इसका पता तब चलेगा जब मोराटोरियम 31 अगस्त तक खत्म हो जाएगा।

एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के एनालिस्ट सिद्धार्थ पुरोहित ने कहा कि तब तक बैंक असेट क्वॉलिटी पर कोविड-19 के वास्तविक प्रभाव को नहीं समझ सकते हैं।

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