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- Rajasthan Road Accident Statistics; How Many People Died In Accident In Rajasthan? All You Need To Know About National Crime Records Bureau Report
जयपुरएक घंटा पहलेलेखक: आदि देव भारद्वाज
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टोंक। एनएच 12 पर कुछ दिनों पहले सड़क हादसे में कार सवार मां-बेटे की मौत हो गई।
- देशभर में होने वाली कुल मौतों में 6.8 प्रतिशत मौतें राजस्थान में हुईं
- रोड एक्सीडेंट में राजस्थान में 2019 में 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुईं
साल 2019 में सड़क हादसों समेत देशभर में सभी प्रकार की दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामलों में राजस्थान चौथे नंबर पर रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में होने वाली कुल मौतों में 6.8 प्रतिशत मौतें राजस्थान में हुई हैं जबकि प्रदेश का देश की जनसंख्या में अनुपात 5.9 प्रतिशत है। जहां तक बात सड़क दुर्घटनाओं की है तो राजस्थान में साल 2019 में 10 हजार से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई। इसमें भी राजस्थान चौथे नंबर पर रहा है।
पिछले साल राजस्थान में विभिन्न हादसों में 24,281 मौतें हुईं। साल 20018 की तुलना में इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई है। वहीं देशभर की बात करें तो साल 2018 की तुलना में 2019 में राष्ट्रीय स्तर पर दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में 2.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। साल 2019 में 4,21,104 सड़क हादसों में डेढ़ लाख से अधिक लोगों की देशभर में सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई है।
इंजीनियरिंग फॉल्ट सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों की मानें तो दुर्घटनाओं में मानवीय पक्ष, इंजीनियरिंग फॉल्ट्स तथा इमरजेंसी रेस्पांन्स का अभाव रहा है। पीपल्स् ट्रस्ट की सीईओ और रोड सेफ्टी एक्सपर्ट प्रेरणा अरोड़ा सिंह का मानना है कि सड़क हादसों में सबसे बड़ा कारण इंजीनियरिंग फॉल्ट का है, जबकि हम सारा दोष ड्राइवर पर मढ़कर बरी हो लेते हैं।

लूणकरणसर। एनएच 62 पर हाल ही में ट्रक की टक्कर से बाइक सवार तीन की मौत हो गई।- फाइल फोटो
प्रेरणा कहती हैं कि हमने हाईवेज तो बना दिए लेकिन ये गांवों के बीच से खेतों को काटकर ही बनाए गए हैं। जाहिर है कि कोई भी चार लेन या छह लेन का हाईवे गांव, ढाणी से होकर ही निकलेगा। ऐसा होने पर हमने पैदल चलने वाले के लिए तो सुरक्षा के कोई उपाय किए ही नहीं हैं।
टोल प्लाजा पर रुकने को मजबूर होते हैं, ऐसी व्यवस्था गांवों-ढाणियों के आने पर भी हो
प्रेरणा कहती हैं- हमें टोल प्लाजा काफी दूर से नजर आ जाता है और हम न चाहकर भी वहां रुकने को मजबूर होते हैं क्योंकि हमें वहां रोका जाता है। जब हमारी गाड़ी किसी गांव से होकर निकलती है तो उसके लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। सैकड़ों गांव ढाणी हाईवे को कनेक्ट करते हैं और परिणाम रोड एक्सीडेंट के रूप में सामने आता है। ऐसी सभी जगहों पर पीले साइन के जरिए इस बारे में सूचित किया जाना चाहिए।

जैसलमेर। गुजरात के श्रद्धालुओं की कार ट्रैक्टर से टकरा गई। हादसे में 3 की मौत हो गई।
आधे सड़क हादसे नेशनल हाईवेज पर
कुल सड़क हादसों में 50 प्रतिशत नेशल हाइवे पर हो रहे हैं जो पूरा राज्य में 3-4 प्रतिशत है। ट्रैफिक एक्सीडेंट्स की बात करें तो इसमें भी खास बात यह है कि अजमेर, जयपुर, बीकानेर, कोटा, जोधपुर, उदयपुर और भरतपुर संभागीय मुख्यालय में अन्य जिलों की तुलना में कहीं ज्यादा हादसे हो रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट्स में कमी आई है लेकिन तीन राज्यों में ये हादसे बढ़ गए हैं। 53379 हादसों के साथ इनमें उत्तरप्रदेश पहले और राजस्थान दूसरे नंबर पर है। राजस्थान में साल 2018 में 22401 ट्रैफिक एक्सीडेंट्स हुए जो 2019 में बढ़कर 24281 हो गए।

बीकानेर। शनिवार को जोधासर गांव के पास सेना की गाड़ी पलटने से दो अधिकारियों की मौत हो गई।- फाइल फोटो
चेन्नई मॉडल अपनाने की जरूरत
इमरजेंसी रेस्पॉन्स मेकेनिज्म हादसों में कमी लाने में महत्वपूर्ण रोल अदा करता है। हाई रिस्क जोन एरिया में 20 किमी की दूरी पर एंबुलेंस की तैनाती, स्पीड इंडीकेटर्स, रोड पर लगने वाले चेतावनी संकेतक, जंक्शन्स की सही डिजाइनिंग, नॉन मोटोराइज्ड व्हीकल्स के लिए उचित स्पेस तथा दो वाहनों की तैनाती वाले आईआईटी चेन्नई मॉडल ने कई राज्यों में कमाल का काम किया है। इस मॉडल को राज्य में भी लागू किया जाना चाहिए। राज्य में हाईवे का जाल सा बिछा है और इसे बड़े साइज को देखते हुए ऑडिट रिपोर्ट में उठाए गए सभी उपाय किए जाने चाहिए।
सबसे अधिक मौतों वाले टॉप 10 राज्य
| राज्य | कुल मौतें |
| महाराष्ट्र | 70,329 |
| मध्यप्रदेश | 42,431 |
| उत्तरप्रदेश | 40,596 |
| राजस्थान | 24,281 |
| कर्नाटक | 25,451 |
| गुजरात | 23,910 |
| तमिलनाडु | 22,404 |
| छत्तीसगढ़ | 19789 |
| आंध्रप्रदेश | 17,938 |
| प.बंगाल | 15985 |
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