Market News In Hindi : SEBI imposes 10-year ban on Share Pro Services, 24 institutions including three of its executives from doing business in the stock market | शेयर प्रो सर्विसेज, इसके तीन अधिकारियों सहित 24 संस्थानों पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर सेबी ने दस साल का प्रतिबंध लगाया

  • टॉप मैनेजमेंट के साथ सांठ-गांठ कर उठाया गया फायदा
  • सेबी ने कहा कि कुछ लोग मार्च 2016 के बाद से ही प्रतिबंधित हैं

दैनिक भास्कर

Jul 08, 2020, 10:21 PM IST

मुंबई. बाजार नियामक सेबी ने बुधवार को असेट्स के डायवर्जन से जुड़े मामले में शेयर ट्रांसफर एजेंट शेयरप्रो सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, उसके तीन वरिष्ठ अधिकारियों और 24 अन्य संस्थाओं को शेयर मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया है। फर्म के अलावा, जिन अन्य लोगों को शेयर बाजार में कारोबार पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें फर्म के एमडी गोविंद राज राव और इंदिरा करकेरा शामिल हैं।

ये लोग शेयरप्रो के कई क्लाइंट कंपनियों के लिए उपाध्यक्ष और क्लाइंट मैनेजर हैं।

कुछ लोगों पर 3 से 7 साल तक का प्रतिबंध

सेबी ने बुधवार को जारी आदेश में कहा कि शेयरप्रो, इसके वरिष्ठ अधिकारियों और दो अन्य व्यक्तियों को 10 साल के लिए बाजार से प्रतिबंधित किया गया है। जबकि अन्य संस्थाओं पर 3 साल से लेकर 7 साल तक प्रतिबंध लगाया गया है। शेयरप्रो और उसके मैनेजमेंट ने अन्य संस्थाओं के साथ मिलीभगत कर संबंधित परिसंपत्तियों (प्रतिभूतियों और लाभांश) के डायवर्जन की सुविधा प्रदान की।

जांच में ऑडिट के साथ छेड़छाड़

सेबी ने जांच में पाया कि इसके अलावा, रिकॉर्ड्स का ठीक से रखरखाव नहीं किया गया था और ऑडिट के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई थी। इंटरनल चेक्स और बैलेंस के साथ समझौता किया गया था। विभिन्न संस्थाओं ने सक्रिय रूप से टॉप मैनेजमेंट के साथ सांठगांठ की और वे धोखाधड़ी से फायदा उठाए। जांच के दौरान कुछ संस्थाओं को एक-दूसरे के साथ और शेयरप्रो के प्रबंधन के साथ जुड़ाव पाया गया।

धोखाधड़ी का शेयर बाजार में बड़ा असर है

सेबी ने कहा, शेयरप्रो और उसके टॉप मैनेजमेंट द्वारा की गई धोखाधड़ी काफी बड़ी है और इसका शेयर बाजार में इसका बहुत व्यापक असर है। सेबी ने पाया कि शेयरप्रो, जी आर राव और इंदिरा करकेरा इस धोखाधड़ी के पीछे मुख्य खिलाड़ी थे। ये लोग लाभांश को अवैध रूप से ठिकाने लगाने और आरटीए के सिस्टम में आंतरिक जांच और संतुलन के समझौते के माध्यम से शेयरों की हेराफेरी में शामिल थे।

रिकॉर्ड के साथ भी छेड़छाड़ की गई

सेबी ने पाया कि इसमें उचित प्रक्रियाओं का पालन न करना और रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ भी शामिल है। बाकी अन्य संस्थाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से धोखाधड़ी में शामिल थीं। इस प्रक्रिया के दौरान विभिन्न बाजार मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए सेबी ने फर्म और संस्थाओं को अलग-अलग अवधि के लिए शेयर बाजार तक पहुंचने से प्रतिबंधित दिया है। सेबी ने कहा कि कुछ लोग इसमें से मार्च 2016 के बाद से ही प्रतिबंधित हैं।

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