नई दिल्ली: दिल्ली में हुए सीरो सर्वे के मुताबिक 24% आबादी के कोरोना से संक्रमित होने के संकेत मिले हैं. सीरो सर्वे में ब्लड सैंपल के जरिए यह देखा जाता है कि वास्तव में लोगों का कौन सा खंड या अंश संक्रमित हो गया है. क्या आम जनता में कोरोना वायरस से आने वाली एंटीबॉडी मौजूद है? इससे यह पता लगाया जाता है कि ऐसे लोग जिनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं है, क्या उनमें भी कोरोना वायरस ठीक हो चुका है और उनके शरीर में एंटीबॉडी बनी है?
इस लिहाज से देखें तो सीरो सर्वे के नतीजे बताते हैं कि राजधानी में किस हद तक कोरोना फैल चुका है. अब तक दिल्ली में तकरीबन 24 फीसद आबादी कोरोना के संक्रमण के चपेट में आई. मतलब उनमें कोरोना एंटीबॉडीज मिली हैं. ज्यादातर लोगों में लक्षण नहीं मिले. यानी इनके शरीर में कोरोना से लड़ने की क्षमता विकसित हो गई. इसका कारण ये है कि 24 प्रतिशत आबादी के कोरोना के संपर्क में आने के बावजूद उस स्तर पर ना मौतें हुईं और ना ही सामुदायिक संक्रमण हुआ. यानी सर्वे के नतीजे बताते हैं कि ये लोग कोरोना से सुरक्षित हुए और कोरोना का वैसा फैलाव भी नहीं हुआ, जितनी आशंका व्यक्त की जा रही थी.
इसका आशय ये भी है कि इन 24 फीसद लोगों में कोरोना से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज तैयार हो गई हैं और ये लोग इस महामारी से पूरी तरह सुरक्षित हैं. शरीर में कोरोना एंटीबॉडीज का मतलब ये भी हुआ कि भविष्य में भी कोरोना इन पर प्रभाव नहीं डाल पाएगा.
सीरो सर्वे का मकसद ये जानने के लिए किया गया था कि कितने लोगों का शरीर कोरोना से लड़ने के लिए तैयार हो चुका है. यानी कितने लोगों में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज बनी हैं या नहीं. इसके लिए सर्वे में एंटीबॉडीज का रैपिड टेस्ट किया गया. इस सर्वे के तहत दिल्ली के 11 जिलों में 27 जून से 10 जुलाई तक किया गया सर्वे. 21387 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए. 10 शहरों में सर्वे हुआ है. मुंबई, अहमदाबाद, पुणे, सूरत, इंदौर, कोलकाता, ठाणे, जयपुर, चेन्नई और दिल्ली में ये सर्वे हुआ.
