कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तेजी से बढ़ते जा रहे कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए राज्य सरकार ने सप्ताह में 2 दिन लॉकडाउन रखने का निर्णय लिया है। उद्योग जगत का मानना है कि इससे सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव जूट उद्योग पर पड़ेगा।
राज्य प्रशासन ने कोविड-19 संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों के देखते हुए पूरे राज्य में इस सप्ताह में दो दिन- गुरुवार और शनिवार को लॉकडाउन लागू करने का फैसला किया है। इस बार यह लॉकडाउन 23 जुलाई और 25 जुलाई को होगा। राज्य सरकार की अधिसूचना के मुताबिक इस दौरान जूट मिल का मुख्य द्वार बंद रहेगा और किसी भी मजदूर को अंदर आने या जाने की इजाजत नहीं होगी। राज्य के जूट मिलों में अलग-अलग दिन बंदी रहती है। अधिकतर मिलो में शुक्रवार को बंदी रखी जाती है। लेकिन चुकी अब जब सरकार ने शनिवार और गुरुवार को बंदी की घोषणा कर दी है तो माना जा रहा है कि इस सप्ताह में 3 दिन बंदी हो जाएगी। इससे न केवल कारोबार प्रभावित होगा बल्कि मजदूरों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि इस बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है कि जूट मिलों में तालाबंदी के दौरान मजदूरों को वेतन मिलेगा या नहीं।
हालांकि, राज्य प्रशासन ने कहा है कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान यदि मजदूर अंदर ही रहते हैं, तो उन्हें काम करने की इजाजत दी जाएगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि लॉकडाउन के दिनों में जूट मिलें बंद रहेंगी, लेकिन यदि कारखाने के कर्मचारी परिसर के अंदर हैं, तो काम करने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि जूट मिल मालिकों का कहना है कि इसके लिए उन्हें अतिरिक्त लागत वहन करनी होगी, क्योंकि मजदूरों के रहने और खाने का इंतजाम उन्हें ही करना होगा।
उद्योग सूत्रों ने कहा कि इसके अलावा यदि मजदूर पूरे समय परिसर के अंदर ही साथ में रहते हैं, तो कोविड-19 संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाएगा। अगले सप्ताह में बुधवार यानी 29 जुलाई को लॉक डाउन रखा जाएगा। एक और दिन बंदी रखी जाएगी लेकिन वह तारीख अभी तय नहीं की गई हैं इसीलिए अगले सप्ताह अभी कम से कम 2 दिनों की बंदी की
आशंका जूट मिलों को है। 31 जुलाई यानी अगले सप्ताह की शुक्रवार तक यह पाबंदियां लागू रहेंगी। गौरतलब है कि जूट मिलों को 24 मार्च को बंद करने के बाद एक जून से दोबारा पूरी तरह कामकाज की अनुमति दी गई थी। यह भी आरोप लगे थे कि लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को वास्तविक वेतन नहीं दिया गया।
