पटना15 मिनट पहले
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- आईसीएमआर ने एक्यूरेसी के लिए राज्य सरकार को दिया निर्देश
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने राज्य सरकार से कहा कि जिलों में रैपिड एंटीजन टेस्ट से जांच की संख्या बढ़ाए और एक्यूरेसी के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट से भी जांच करें। एंटीजन टेस्ट से ज्यादा से ज्यादा टेस्ट किए जा सकते हैं। यह इसलिए जरूरी है कि यह पता लगाया जा सके कि राज्य में कोरोना वायरस के कितने मरीज संक्रमित हैं।
आईसीएमआर ने अपने निर्देश में कहा है कि एंटीजन टेस्ट और आरटी-पीसीआर टेस्ट के परिणामों को एक-दूसरे से लिंक करें। ऐसा जरूरी नहीं है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट में कोई व्यक्ति निगेटिव आया हो, तो उसमें कोरोना वायरस नहीं है। दरअसल रैपिड एंटीजन टेस्ट की विश्वसनीयता आरटी-पीसीआर की तुलना में थोड़ी कम है।
बिहार में अभी रैपिड एंटीजन टेस्ट अधिक हो रही
जांच की कम संख्या को लेकर बिहार की आलोचन हो रही थी, लेकिन राज्य ने रैपिड एंटीजन किट से अनुमंडल स्तर से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक में जांच शुरू कर दिया है। इसका परिणाम भी सामने आने लगा है। प्रतिदिन मरीजों की संख्या में दो-ढाई हजार की बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन, आईसीएमआर के निर्देश के अनुसार रैपिड जांच में जो रिपोर्ट निगेटिव आती है, उसकी क्राॅस चेकिंग आरटीपीसीआर से होनी चाहिए। लेकिन, बिहार में अभी क्राॅस चेकिंग नहीं हो रही है। इस कारण से कोरोना संक्रमण की चेन की पूरी जानकारी भी नहीं मिल रही है।
रैपिड एंटीजन टेस्ट में 20 मिनट में रिपोर्ट
एंटीजन टेस्ट में कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव है या निगेटिव, इसकी रिपोर्ट 15-20 मिनट में मिल जाती है और आरटी-पीसीआर की तुलना में सस्ती भी है। वहीं इससे चलते-फिरते जांच की जा सकती है। अभी राज्य सरकार ने तीन लाख किट जांच के लिए मंगवाई है।
आरटीपीसीआर से 3-4 दिनों में रिपोर्ट
बिहार में आरटीपीसीआर से आज की स्थिति में रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन का समय लगता है। यह जांच अभी राज्य के सभी 9 मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और जिला अस्पतालों में हो रही है। तीन प्राइवेट लैब को भी आईसीएमआर ने अनुमति दी है। आरटीपीआर जांच को लैब में भेजना जरूरी होता है। यह महंगी भी है।
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