DNA Made in india campaign against chinese products | DNA ANALYSIS: भारत के 1 करोड़ से ज्यादा लोगों का Made In India मुहिम को समर्थन

नई दिल्ली: चीन के खिलाफ ऐसी ही एकजुटता भारत के लोग भी दिखा रहे हैं. 30 जून को Zee News ने Made In India नाम से एक मुहिम शुरू की थी. इस मुहिम का मकसद था Made In India को मजबूत बनाकर Made In China को जवाब देना. हमारी इस मुहिम का व्यापक असर हुआ है. ये पिछले एक महीने से चल रही है और अब तक इसमें हमें एक करोड़ से ज्यादा लोगों का समर्थन मिल चुका है. भारत के एक करोड़ से ज्यादा लोग Zee News के नंबर पर Missed Call देकर Made In India मुहिम के पक्ष में अपना समर्थन जता चुके हैं. ये दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल जनमत संग्रह है इसलिए आज आपको इन एक करोड़ लोगों की ताकत पहचाननी चाहिए.

संख्या में बड़ी शक्ति
आंकड़ों के मुताबिक, भारत में न्यूज चैनलों के नियमित दर्शकों की संख्या 12 करोड़ 49 लाख है. यानी ये वो लोग हैं जो हर रोज अलग-अलग न्यूज चैनल देखते हैं. भारत में औसतन एक परिवार में 5 से 6 लोग होते हैं. यानी जिन एक करोड़ लोगों ने हमारे नंबर पर Missed Calls दी हैं वो किसी ना किसी मायने में देश के 5 से 6 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं इसलिए आप इसे भारत के एक करोड़ परिवारों और 6 करोड़ लोगों की राय भी कह सकते हैं या आप ये भी कह सकते हैं कि भारत में टेलीविजन पर न्यूज चैनल देखने वालों में से 50 प्रतिशत लोग अब तक इस मुहिम में Zee News के साथ जुड़ चुके हैं. इसलिए हम बार बार कहते हैं कि संख्या में बड़ी शक्ति होती है और आप संख्या के दम पर चाहें तो क्रांति भी कर सकते हैं.

हमारी ये मुहिम अब भी जारी है और हम चाहते हैं कि आप हमारे नंबर पर Missed Call देकर एक नया कीर्तिमान बनाएं और इस संख्या को इससे भी कहीं आगे लेकर जाए. लेकिन आज आपको ये समझना चाहिए कि एक करोड़ लोगों के समर्थन का अर्थ क्या है. हमें पता है कि जिन लोगों को ये सच हजम नहीं होगा वो हमारी Trolling शुरू कर देंगे और आपके समर्थन का मजाक बनाएंगे इसलिए ऐसे लोगों को जवाब देने के लिए आज हमने कुछ आंकड़े निकाले हैं.

दुनिया का सबसे बड़ा गैर धार्मिक जमावड़ा
पिछले साल सऊदी अरब जाकर हज करने वाले लोगों की संख्या 24 लाख थी जबकि हमें Missed Call देने वालों की संख्या इससे चार गुना ज्यादा है. अगर ये एक करोड़ लोग एक साथ सड़क पर आ जाएं और Made In India के समर्थन में मार्च निकालें या फिर रैली करें तो ये दुनिया का सबसे बड़ा गैर धार्मिक जमावड़ा होगा.

इसी तरह कुंभ मेला दुनिया का अकेला ऐसा धार्मिक आयोजन है जिसमें श्रद्धालुओं की संख्या 5 से 8 करोड़ तक होती है और शाही स्नान के दिन तो करीब 2 करोड़ से ज़्यादा श्रद्धालु कुंभ मेले का हिस्सा बनते हैं. कुंभ मेले की भव्यता को अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर Zee News के जरिए इस मुहिम को समर्थन देने वाले ये एक करोड़ लोग एक साथ एक जगह जमा हो जाएं तो क्या हो सकता है? अगर ये एक करोड़ लोग एक साथ अपने हाथों में क्रांति की मशाल थाम लें या फिर अपने मोबाइल फोन की FlashLight भी On कर दें तो इस तस्वीर को अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है.

चीन प्रेमी गैंग को ये जानकर बहुत दुख होगा कि दुनिया के 193 देशों की जनसंख्या 5 करोड़ से कम है. हमें अब तक एक करोड़ से ज्यादा लोग Call कर चुके हैं और अगर आपके इरादे मजबूत हैं तो आप इस आंकड़े को 5 करोड़ तक भी पहुंचा सकते हैं.

पाकिस्तान के हर दुष्प्रचार का जवाब
वर्ष 2016 में ब्रिटेन को यूरोप से अलग करने के पक्ष में एक करोड़ 74 लाख लोगों ने वोट किया था. इसे Brexit के नाम से जाता है. अब आप सोचिए कि अगर एक करोड़ 74 लाख लोग अपने देश को यूरोप से अलग करने का फैसला ले सकते हैं तो फिर भारत के 1 करोड़ लोग चीन को दुनिया में अलग-थलग क्यों नहीं कर सकते?

अगर ये एक करोड़ लोग सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन करते हुए एक दूसरे से एक-एक मीटर की दूरी पर एक लाइन में खड़े हो जाए तो ये लाइन 20 हजार किलोमीटर लंबी होगी. दुनिया में जो दो शहर एक दूसरे से सबसे ज्यादा दूरी पर हैं उनके बीच की दूरी है 19 हजार 996 किलोमीटर. ये शहर हैं अर्जेंटीना का रोसारिया और चीन का शिंगुआ यानी अगर ये एक करोड़ लोग एक लाइन में खड़े हो जाएं तो आराम से इसी दूरी को कवर कर लेंगे.

पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए- इंसाफ के सदस्यों की कुल संख्या भी एक करोड़ है यानी Zee News को समर्थन देने वाले एक करोड़ लोग चाहें तो अकेले अपने दम पर ही पाकिस्तान के हर दुष्प्रचार का जवाब दे सकते हैं.

भारत की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी कांग्रेस के वर्तमान सदस्यों की संख्या भी अभी सिर्फ 2 करोड़ ही है. पूरी दुनिया में इस समय 95 बड़े देशों की राजनैतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं की संख्या एक करोड़ से बहुत कम है.

और जिस हांगकांग की आजादी की बात से हमने अपने इस विश्लेषण की शुरुआत की थी उस हांगकांग की कुल आबादी भी सिर्फ 75 लाख है यानी इन एक करोड़ लोगों से 25 लाख कम. अब आप खुद सोचिए अगर ये एक करोड़ लोग हांगकांग में चीन के अत्याचार के खिलाफ या चीन में बने सामान के खिलाफ खड़े हो जाएं तो क्या चीन इनका मुकाबला कर पाएगा. इसलिए अपनी संख्या की ताकत को पहचानिए और हमारी मुहिम को अपना समर्थन जारी रखिए.

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