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इस्लामाबादएक घंटा पहले
दो महीने पहले जब पीआईए में फर्जी पायलटों का मामला सामने आया था तब यूरोप और कई देशों ने पीआईए पर ही बैन लगा दिया था। ये अब तक जारी है। (फाइल)
- पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) की एक इंटरनल रिपोर्ट मीडिया में लीक हुई है
- इसमें ज्यादातर पायलटों को नाकाबिल और सरकारी फंड उड़ाने वाला बताया गया
पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइंस कंपनी पीआईए बेहाल है। इसका खुलासा पीआईए की ही एक इंटरनल रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में पायलटों और केबिन क्रू को लेकर हैरान कर देने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक- सरकारी एयरलाइंस के 49 से 81% पायलट तो कभी ड्यूटी ही पूरी नहीं करते। सरकार द्वारा तय होटलों में ठहरने की बजाए फाइव स्टार होटल्स में रूम बुक कराते हैं। इन पायलटों और केबिन क्रू ने 41 करोड़ पाकिस्तानी रुपए तो सिर्फ होटलों में ठहरने पर ही उड़ा दिए। रिपोर्ट में एक बात छिपाने की कोशिश हुई है। इसमें यह नहीं बताया गया है कि यह रिपोर्ट किस साल या कितने महीनों के खर्च पर आधारित है। दो महीने पहले देश के एविएशन मिनिस्टर ने संसद में कहा था- हमारे 40 फीसदी पायलट फर्जी हैं।
सैलरी ज्यादा दी जा रही है
रिपोर्ट में साफ कहा गया है- पीआईए के ज्यादातर पायलट नाकाबिल हैं। 49 से 81 फीसदी पायलट और केबिन क्रू तो अपने फ्लाइंग ऑवर्स (ड्यूटी के घंटे) तक पूरे नहीं करते। इन्हें बहुत ज्यादा सैलरी दी जा रही है। एयरलाइंस को बचाने के लिए सबसे पहले ये खर्च कम करने होंगे। एविएशन इंडस्ट्री में पीआईए का स्तर सबसे घटिया है।
ऐसे उड़ाया जाता है सरकार का पैसा
रिपोर्ट के मुताबिक, पीआईए स्टाफ के लिए कराची में एक होटल है। इसमें 300 कमरे हैं। इसके बावजूद पायलट और केबिन क्रू इस होटल में नहीं ठहरते। ये लोग हमेशा फाइव स्टार होटलों को तवज्जो देते हैं। अगर स्टाफ इन हाउस फैसेलिटीज का इस्तेमाल करे तो करोड़ों रुपए बचाए जा सकते हैं। इन्हीं हरकतों की वजह से एयरलाइन को 41 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। रिपोर्ट में घाटा किस दौरान हुआ? इसका जिक्र नहीं है। हालांकि, किस शहर की किस होटल का कितना बिल पेमेंट हुआ, इसकी लिस्ट दी गई है।
जिम्मेदारी तय हो
रिपोर्ट में कहा गया है- पीआईए में किसी तरह का मैकेनिज्म यानी काम का ढांचा ही नहीं है। ऐसे में हालात सुधरने की बात सोचना भी बेकार है। केबिन और कॉकपिट क्रू यानी पायलटों की जिम्मेदारी तय करनी होगी। उन्हें काबिल बनाना होगा, क्योंकि स्टैंडर्ड के मामले में पीआईए बेहद निचले स्तर पर है। इन सभी की सैलरी और दूसरे खर्च तुरंत कम करने होंगे।
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