रायसिंह नगर21 मिनट पहले
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रायसिंह नगर। बरसात में यह इलाका दलदल में बदल जाता है। लोग परेशान होकर यहां से पलायन करने लगे हैं।
- 10 किलोमीटर के क्षेत्र में जीना हुआ मुश्किल, लोग बॉर्डर एरिया से पलायन करने लगे
(मनप्रीत सिंह)। बॉर्डर क्षेत्र के दर्जनों गांवों का बड़ा भू-भाग सेमग्रस्त होता जा रहा है। सेम की समस्या (पानी जमा होना) से सीमा सुरक्षा बल की कई चेक पोस्ट भी प्रभावित हो रही हैं। बीएसएफ को बॉर्डर में जहां सेम के चलते गश्त में परेशानी होने लगी है वहीं चेक पोस्ट के भवनों को भी क्षति पहुंच रही है। सेम की दलदल से जवानों को ड्यूटी के दौरान परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है लेकिन इस तरफ प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया है। न ही सेम की समस्या के निराकरण के लिए कोई उपाय किया है।
किसानों को भी सेम की समस्या के कारण नुकसान हो रहा है। बॉर्डर की नहरी भूमि सेम से खराब हो चुकी है जिससे अब किसान इस भूमि में फसल तक पैदा नहीं कर पा रहे हैं। रायसिंहनगर के सीमावर्ती ग्राम पंचायत 22 पीटीडी, 75 एनपी तथा 43 पीएस के करीब दस किलोमीटर क्षेत्र में सेम आ गई है।
बरसात में दलदल बन जाता है इलाका, मकान और फसलें बर्बाद हो रहे
क्षेत्र में जल स्तर दो से चार फीट गहरा है। बरसात होने पर यह इलाका दलदल में तब्दील हो जाता है जिससे आबादी भूमि में नींव कमजोर होने के कारण मकान क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, फसलों को नुकसान हो रहा है। वहीं सीमा सुरक्षा बल के जवानों को सीमा क्षेत्र की चौकसी करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

बॉडर एरिया में भरा पानी।
रायसिंहनगर सीमा सुरक्षा बल की पृथ्वीसर व फरीदसर चेक पोस्ट के हालात तो बदतर हैं। करीब एक दशक से जलस्तर बढ़ने से सेम अपने आगोश में क्षेत्र को लेती जा रही है। समय रहते यदि कोई कदम नहीं उठाए गए तो यह क्षेत्र वीरान हो जाएगा।
लोग बॉर्डर एरिया से पलान करने लगे
ग्रामीणों ने बताया कि अनेक लोग तो सेम के कारण अपने घर बॉर्डर क्षेत्र से छोड़कर अन्यत्र रोजगार के लिए पलायन कर गए हैं। सेम की समस्या को लेकर 22 पीटीडी के आसपास के लोगों ने कई बार प्रशासन के सामने इस समस्या को रखा। लेकिन अभी तक समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। बॉर्डर पर फेंसिंग के पार पाकिस्तान में सादकी नाम की नहर है। उस नहर के कारण यहां सेम हो रही है। इससे पूरा इलाका बरसातों में दलदल बन जाता है।
क्या है सेम की समस्या
वाटर लेवल ऊपर आ जाने को सेम की समस्या कहा जाता है। मिट्टी में आद्रता अधिक हो जाती है। आस-पास में जब पानी अधिक हो तो वह वाटर लेवल ऊपर आ जाता है। आमतौर पर रायसिंहनगर में 35 से 40 फीट नीचे पानी है जबकि इन बॉर्डर के गांव में जमीन से मात्र तीन चार फीट पर ही पानी निकल रहा है। पानी रिस-रिस कर एकत्र होता रहता है।
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