नई दिल्ली7 मिनट पहले
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सिब्बल और गुलाम नबी उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर पार्टी में ऊपर से नीचे तक बदलाव करने की मांग की है।- फाइल फोटो
- सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद कांग्रेस असंतुष्ठ नेताओं से बात कर रही है, उन्हें मनाने की कोशिश जारी है
- असंतुष्ठ नेताओं ने कहा- चिट्ठी सोनिया के खिलाफ नहीं थी, बल्कि पार्टी में सुधार की मांग को लेकर है
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल लगातार ट्वीट कर अपनी बात रख रहे हैं। बुधवार को उन्होंने कहा, ‘सिद्धांतों के लिए लड़ते समय… जीवन में, राजनीति में, अदालत में, सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर…विपक्ष तो मिल ही जाता है, लेकिन समर्थन का इंतजाम करना पड़ता है।’
उधर, कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया था। सूत्रों के हवाले से बताया कि अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुलाम नबी आजाद से फोन पर बात की। भरोसा दिलाया कि उनकी चिंताओं पर विचार किया जाएगा। सिब्बल और गुलाम नबी उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर पार्टी में ऊपर से नीचे तक बदलाव करने की मांग की है। सीडब्ल्यूसी की बैठक में चिट्ठी लिखने वाले नेताओं की भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाया गया। इससे दोनों नेता नाराज हो गए थे। (इस चिट्ठी से जुड़ी पूरी खबर यहां पढ़ें)
When fighting for principles
In life
In politics
In law
Amongst social activists
On social media platformsOpposition is often voluntary
Support is often managed
— Kapil Sibal (@KapilSibal) August 26, 2020
सिब्बल बोले- पद नहीं देश मायने रखता है
It’s not about a post
It’s about my country which matters most— Kapil Sibal (@KapilSibal) August 25, 2020
असंतुष्टों ने कहा- चिट्ठी सोनिया गांधी के खिलाफ नहीं थी
असंतुष्टों का कहना है कि चिट्ठी सोनिया गांधी के खिलाफ नहीं थी, बल्कि पार्टी में सुधार की मांग को लेकर पार्टी अध्यक्ष को लिखी गई थी। उनका ये भी कहना है कि चिट्ठी लीक नहीं होना चाहिए था। उधर, मंगलवार सुबह पार्टी के एक असंतुष्ट और निलंबित नेता संजय झा ने ट्वीट किया, “ये एक अंत की शुरुआत है।”
क्या हुआ था कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में
सीडब्ल्यूसी की बैठक सोमवार को हुई। इसमें नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर माहौल तनावपूर्ण रहा। बैठक शुरू होते ही अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नेतृत्व में बदलाव संबंधी 23 वरिष्ठ नेताओं की चिट्ठी का हवाला देते हुए पद छोड़ने की पेशकश की। हालांकि, 7 घंटे मंथन के बाद वह 6 महीने और अंतरिम अध्यक्ष बनी रहने पर सहमत हो गईं। बैठक में चिट्ठी लिखने वाले नेताओं की भाजपा से मिलीभगत का आरोप हावी रहा। ऐसा कहा गया कि ये आरोप राहुल गांधी ने लगाया। राहुल ने चिट्ठी की टाइमिंग पर सवाल उठाए। चिट्ठी पर दस्तखत करने वालों में शामिल गुलाम नबी आजाद ने भाजपा से मिलीभगत साबित होने पर संन्यास लेने की बात कह दी। कपिल सिब्बल भी नाराज हो गए। (कांग्रेस वर्किंग कमेटी की कलह से जुड़ी पूरी खबर यहां पढ़ें)
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